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पटाखे जलाने वाले जल्दी होते हैं इस जानलेवा बीमारी का शिकार

Wed, 18 Oct 2017 07:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : डेमो
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यूं तो आप जानते ही हैं कि पटाखों की वजह से न सिर्फ प्रदूषण, बल्कि शरीर को काफी नुकसान होता है। लेकिन शायद आपको नहीं पता कि जो लोग पटाखे जलाते हैं उनमें 60 फीसदी जल्दी कैंसर के शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह है पटाखे जलाने के बाद हाथ नहीं धोना।
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डॉक्टरों के मुताबिक, पटाखों में जहरीला कैमिकल होता है, जो पटाखे जलाते वक्त हाथ पर लगा रहता है। ज्यादात्तर लोग अपने हाथ अच्छे से साफ न करते हुए कपड़े से पोंछ लेते हैं और इसके बाद भोजन करते हैं। जिसकी वजह से भोजन के साथ हाथ में लगा जहरीला रसायन शरीर के अंदर पहुंच रहा है। बच्चे और युवा ज्यादा लापरवाह होते हैं।

संभलकर करें मुंह मीठा
मेदांता अस्पताल के डॉ.बोरनाली दत्ता के मुताबिक अस्थमा मरीज दिन में मास्क पहनकर घर से निकलें और रात में कहीं भी नहीं जाएं। क्यूआरजी के डॉ. दानिश कहते हैं कि अस्थमा मरीज अपने पास हर पल इनहेलर जरूर रखें।
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वहीं, मेदांता की डॉ. सुशीला कटारिया का कहना है कि लोगों को पटाखों के साथ साथ खानपान का भी ध्यान रखना चाहिए। मुंह मीठा करने के चक्कर में लोग बीमार पड़ते हैं।
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मरीजों के लिए नहीं छोड़ें पटाखे

पटाखे - फोटो : self
एम्स ने भी अपील की है कि मरीजों के लिए जहर को वातावरण में घुलने न दें। डॉ. करण मदान कहते हैं कि हर साल पटाखों और प्रदूषण की वजह से एम्स में श्वास के मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाती है।

वहीं, कई बार दिवाली की रात ही मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ता है। मैक्स के डॉ. हिमांशु अग्रवाल बताते हैं कि प्रदूषण के कारण आर्थरायटिस मरीज भी बढ़ते हैं। जिन्हें आर्थरायटिस की शिकायत है, वे दिवाली पर खास सतर्कता बरतें और डॉक्टर के संपर्क में रहें।

जलने पर लगाएं हल्दी दूध का पेस्ट
कालरा अस्पताल के डॉ. आरएन कालरा बताते हैं कि दिल्ली का प्रदूषण लोगों की हड्डियों तक को खोखला कर देता है। इसलिए पटाखे जलाते वक्त अपने पास पानी से भरी बाल्टी जरूर रखें। माचिस की जगह मोमबत्ती से फुलझड़ी या पटाखे जलाएं। आतिशबाजी समतल एरिया में करें और जेब या हाथ में पटाखे न रखें। वे बताते हैं कि जलने पर हल्दी और दूध मिश्रित कर पेस्ट लगाएं। टूथपेस्ट या पेन की इंक भी जलने पर लगा सकते हैं और तत्काल नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें।

फैक्ट्स
70 फीसदी बच्चे और युवा हर साल होते हैं शिकार      
90 फीसदी मामलों में 10 साल तक के बच्चे पटाखों की वजह से बर्न के शिकार      
6 लाख से ज्यादा लोगों की हर साल होती है मौत      
7वें नंबर पर प्रदूषण की सूची में है भारत, डब्ल्यूएचओ कर चुका है अलर्ट
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