श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी सेक्टर-15 की ओर से सामुदायिक भवन में चल रहे रामलीला मंचन में ताड़का वध, सीता का गौरी पूजा के लिए मंदिर में जाने, उपवन में राम और लक्ष्मण के जाने का मंचन किया गया।
कमेटी के निर्देशक अनिल चावला ने बताया कि राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को लेकर विश्वामित्र अपने आश्रम की ओर चल पड़ते हैं। रास्ते में विश्वामित्र ने ताड़का के बारे में बताया।
इसी बीच ताड़का प्रगट हो जाती है और मुनि समेत राम और लक्ष्मण को मारने के लिए दौड़ पड़ती है। गुरु की रक्षा के लिए श्रीराम क्रोधित होकर ताड़का पर बाण से प्रहार करते हैं।
एक ही बाण में ताड़का मृत्यु को प्राप्त हो जाती है। ताड़का का वध करने के बाद दोनों भाई मुनि के आश्रम में पहुंचते हैं और उन्हें निडर होकर यज्ञ करने को कहते हैं।
यज्ञ शुरू होते ही राक्षस मारीच और सुबाहू वहां पहुंचकर यज्ञ में बाधा डालने का प्रयत्न करते हैं। श्रीराम मारीच और सुबाहू का भी संहार कर देते हैं।
कुछ दिनों आश्रम में रहने के बाद विश्वामित्र को सीता स्वयंवर का समाचार मिलता है। मुनि विश्वामित्र दोनों भाइयों को साथ लेकर स्वयंवर में शामिल होने के लिए चल देते हैं।