फरीदाबाद में इस समय स्कूली शिक्षा का बुरा हाल है। न तो स्कूलों की बिल्डिंग ठीक है और न ही वहां बच्चों के पढ़ने के लिए समय पर किताबें आ रही हैं।
जर्जर इमारतों में बच्चों को हमेशा खतरा बना रहता है। लोगों को उम्मीद है कि आम बजट में सरकार स्कूली शिक्षा के लिए बजट बढ़ाएगी।
एनआईटी-दो स्थित हाईस्कूल के शिक्षक यादराम शर्मा कहते हैं कि स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। स्कूल में बच्चे हैं पर किताबें व कॉपियां समय पर नहीं पहुंच रही हैं।
21वीं सदी में भी बैठने के लिए दरी का इस्तेमाल हो रहा है। ड्यूल डेस्क तक विभाग स्कूल में उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। बच्चों की ड्रेस, पेंसिल जैसे महत्वपूर्ण चीजें सत्र बीतने के बाद पहुंच रही हैं।
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बल्लभगढ़) के प्राध्यापक रामवीर शर्मा कहते हैं कि 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ाई का भगवान ही मालिक है। शिक्षकों को शैक्षणिक कार्यों से इतना दूर रखा जा रहा है कि विद्यार्थियों को पढ़ाने का वक्त तक नहीं मिलता। ऐसे में विद्यार्थी केवल नोट्स के जरिये ही तैयारी करते हैं।
कुछ जगहों पर तो एक से 12वीं कक्षा तक गेस्ट शिक्षकों की बदौलत ही स्कूल चल रहे हैं। उम्मीद है कि मोदी सरकार बजट में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए कोई न कोई विशेष कदम उठाएगी।
एक नजर
कुल प्राइमरी स्कूल: 255
कुल सेकेंडरी स्कूल: 42
कुल सीनियर सेकेंडरी स्कूल: 44
कुल कॉलेज: 6 (तीन सरकारी)
सरकारी यूनिवर्सिटी: 1
नहीं भरे गए लंबे समय से रिक्त पद
नेहरू कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश जून ने बताया कि लंबे समय से कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर व प्रोफेसरों के पद रिक्त हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें भरा नहीं गया है। ऐसे में प्रतिवर्ष कॉलेज में मैन पावर की समस्या से विद्यार्थियों को जूझना पड़ रहा है।
तकनीकी शिक्षा का प्रदेश में बुरा हाल
आईटीआई के शिक्षक बृजेश मंगला ने बताया कि तकनीकी शिक्षा का प्रदेश में बुरा हाल हो चला है। डिग्री होल्डर नौकरी के लिए मारे मारे घूम रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को अपनी योग्यता से नीचे उतरकर आईटीआई से सर्टिफिकेट कोर्स करके कंपनियों में काम तलाशना पड़ रहा है।
एमडीयू के कामकाज पर उठ रहे सवाल
नेहरू कॉलेज के विद्यार्थी अजय डागर ने बताया कि महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के कामकाज पर पिछले कई वर्ष से सवाल उठ रहे हैं। रि-अपियर के नाम पर यूनिवर्सिटी लगातार विद्यार्थियों का आर्थिक व मानसिक शोषण कर रही है, जिस पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है। उम्मीद है कि मोदी सरकार ऐसी संस्थाओं पर नकेल कसेगी।