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सूरत-ए-हालः कोरोना के डर से मलेरिया-वायरल का भी इलाज नहीं करा रहे लोग

Thu, 10 Sep 2020 04:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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demo pic - फोटो : Amar Ujala
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दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती 38 वर्षीय सुनील सचदेवा डेंगू संक्रमित हैं। राजा गार्डन निवासी सचदेवा को एक सप्ताह पहले बुखार हुआ था। एक दिन बाद ही जब इनके परिवार में अन्य दो सदस्यों को सर्दी हुई तो इनको कोरोना संक्रमण की आशंका हुई। हालांकि, जांच कराने से बेहतर इन्होंने इम्युनिटी पर जोर देने का फैसला लिया। लेकिन तीन से चार दिन बाद जब बुखार तेज हो गया तो इनको अस्पताल लाना पड़ा। 

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फिलहाल अस्पताल आने के बाद इनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है। ठीक इसी तरह की कहानी दिल्ली एम्स में भर्ती अनूप वर्मा की है। अनूप को इस वक्त डेंगू के साथ साथ कोरोना संक्रमण भी है। शुरुआत में इन्होंने भी जांच कराना बेहतर नहीं समझा लेकिन बाद में दिक्कत बढ़ने पर इन्हें आपातकालीन सेवा की मदद लेनी पड़ी। 

कोरोना वायरस को लेकर इसे खौफ कहें या फिर सेहत के साथ खिलवाड़, लेकिन सच यही है कि कोरोना की आशंका में लोग इन दिनों मलेरिया और वायरल तक का उपचार कराने से कतरा रहे हैं। एक या दो नहीं, दिल्ली के करीब हर बड़े अस्पताल में इस तरह के मामले दिख रहे हैं, जहां शुरुआती लक्षणों को नजरदांज करने वालों को गंभीर हालत में भर्ती करना पड़ा है। ऐसा नहीं है कि मलेरिया, डेंगू या वायरल के साथ कोविड संक्रमण नहीं हो सकता। अगर यह होता है तो वह स्थिति डिकित्सीय तौर पर ठीक नहीं बताई जाती। इसलिए डॉक्टरों की यही अपील है कि लक्षणों को नजरदांज नहीं करें।
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देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के वरिष्ठ डॉ. विकास कुमार का कहना है कि इन दिनों कई तरह का बुखार चल रहा है। कोविड के अलावा डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल जैसे संक्रमण भी सक्रिय हैं। इन सभी के लक्षण लगभग एकजैसे हैं। आमतौर पर लोग इसे कोरोना के शुरूआती लक्षण समझते हुए जांच और उपचार से दूरी बना रहे हैं लेकिन कुछ ही दिन में जब उनकी हालत बिगड़ती है तो उनके पास अस्पताल के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता। 

एक्सपर्ट की सलाह, जागरूक होने की जरूरत
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि इस वक्त कई मरीज ऐसे भी सामने आ रहे हैं जिनमें कोरोना के साथ साथ डेंगू या मलेरिया भी है। कोरोना और डेंगू के कई लक्षण मिलते-जुलते हैं। यदि किसी व्यक्ति को बुखार हो रहा है और वह अस्पताल जाता है तो सबसे पहले उसका कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। यदि उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई तो फिर कोरोना का ही इलाज किया जाता है। डेंगू टेस्ट नहीं किया जाता और हो सकता है कि उस व्यक्ति को डेंगू भी हो। ऐसे में व्यक्ति में मल्टी फेल्योर ऑर्गन हो जाते हैं जिससे मौत भी हो सकती है। इसलिए लोगों को जागरूक रहते हुए किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सीय परामर्श लेनी चाहिए। 

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि कई मरीजों में कोरोना के साथ साथ डेंगू की पहचान भी हो रही है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में सबसे ज्यादा लोगों का सतर्क रहना बेहद जरूरी है। 

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