जनता कर्फ्यू के दौरान रैन बसेरा में रह रहे लोगों को भले ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन देश में कोरोना संक्रमण से लड़ने के जज्बे को सलाम किया जाना चाहिए। देशवासियों को संक्रमण से बचाने के लिए उठाए कदम का स्वागत करते हुए रैन बसेरा में रहने वाले लोगों ने कहा कि यदि एक दिन भूूखे रहने की भी जरूरत हुई तो करेंगे, ताकि किसी परिवार को इस बीमारी से न जूझना पड़े।
रैन बसेरा में रहने वाले अधिकतर लोग रोजाना काम करने के बाद लौटते हुए रेहड़ी पर खाना खाते हैं, लेकिन कर्फ्यू के दौरान वह खाने के लिए करीब 12 बजे तक इंतजार करते नजर आए।
रैन बसेरा में रहने वाले जरनैल सिंह और सुरेंद्र को खाना भेजे जाने का इंतजार था। वहां मौजूद एनजीओ जन पहल के एक कर्मी ने बताया कि यहां रहने वालों को मुश्किलें पेश न आए, इसलिए एनजीओ की तरफ से खाना भिजवाया जाएगा।
हालांकि, दोपहर बाद तक खाना नहीं भिजवाया जा सका था। जरनैल सिंह ने बताया कि रोजाना काम करने के बाद लौटते वक्त बाहर से खाना खाकर आते हैं, लेकिन कर्फ्यू के दौरान कोई विकल्प नहीं है। सभी दुकानें बंद हैं, लेकिन इस पहल से अगर देशवासियों को संक्रमण से बचाया जा सकता है तो खाने का इंतजार करने के लिए तैयार हैं।
एलईडी स्क्रीन तो है, मगर कनेक्शन नहीं
सेक्टर-10 के रैन बसेरा में रहने वालों के लिए यूं तो एलईडी स्क्रीन भी लगवाई गई हैं, लेकिन इसे देखने का मौका किसी को नहीं मिल सका है, क्योंकि कनेक्शन नहीं है। इस वजह से अगले दिन खबरों की जानकारी मिलती है।