अपने भाषण में युवा शक्ति का जिक्र करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वित्त मंत्री से युवाओं के लिए खास की उम्मीद की जा रही है।
युवाओं की उम्मीद है कि युवाओं का देश से संबोधित करने वाले मोदी के जेटली की पोटली से ऐसा कुछ निकलेगा। जिसका हर युवा दिल स्वागत करेगा।
कॉलेज से निकलने वाले छात्रों को रोजगार के नए साधन के साथ स्टार्टअप और इनोवेशन के नए द्वार की उम्मीद है तो खिलाडिय़ों को स्पोट्र्स यूनिवर्सिटी और खेल की बुनियादी सुविधा सुधारने के लिए कुछ नए कदम उठाने का इंतजार किया जा रहा है।
स्कूल, कॉलेजों में डोनेशन के नाम पर कालेधन के लेन-देन पर रोक के लिए डोनेशन को क्रॉस चेक से देना जरूरी किया जाए। एमबीबीएस, इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी शिक्षा की फीस सस्ती करने के साथ आईआईटी व आईआईएम जैसी संस्थानों को बढ़ावा देने के साथ प्राइवेट कॉलेजों की फीस निर्धारण को लेकर व्यवस्था हो।
युवाओं का कहना है कि लोक लुभावन बजट की बजाय कुछ व्यवस्था की जाए, जिससे यहां रोजगार मिले। ह्यूमन रिसोर्स और यूथ कैपासिटी का पूरा इस्तेमाल हो।
युवाओं की प्रतिक्रिया
विक्रम सिंह: ब्रांडेड कपड़े, जूते से लेकर तमाम ऐसी वस्तुएं पर है जिनकी बेहद जरुरत है। इन सब चीजों पर टैक्स पर छूट की उम्मीद है। बाइक से टैक्स ही पूरा हटा दिया जाए। इंटरनेट का डाटा पैक सस्ता किया जाए।
ईशा: स्टार्टअप क्रेज बढ़ रहा है। कम से कम गारंटी पर लोन मिले। सरकारी एजेंसी की व्यवस्था हो, जो इसमें मदद कर सके। रोजगार बढ़ाने के लिए स्टार्टअप को टैक्स फ्री लोन का इंतजाम हो तो बेहतर रहेगा।
आदित्य: शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर हो। एजुकेशन लोन जरूर सस्ता होना चाहिए। जिससे हायर स्टडीज अधिक करने का मौका मिले। इसके लिए जिले में एक नोडल एजेंसी की व्यवस्था की जाए।
अनुजा: गांवों से पलायन रोकने के लिए रोक बजट में इंतजाम हो। गांवों के अलग से बजट हो। जिस तरह से रेल के लिए अलग बजट जारी किया जाता है, उसी तरह कृषि और ग्रामीण विकास के लिए बजट हो।
मोहित: टैक्स स्लैब में सामान्य करने की बजाय आर्थिक आधार पर तय हो। इससे जो अधिक देने योग्य है, उनके लिए अधिक टैक्स लगाया जाए। नशे और गैर जरूरी चीजों पर अधिक से अधिक टैक्स लगे।
सोम्या: स्किल बेस्ड एजुकेशन और सरकारी यूनिवर्सिटी की जरुरत है। सस्ती फीस हो। इससे पैरेंट्स पर बोझ कम होगा। खिलाडिय़ों को शुरुआत में स्पांसर नहीं मिलने से काफी दिक्कत होती होती है। खिलाडिय़ों के लिए केंद्रीय स्तर पर बजट में प्रावधान हो।