कन्या भ्रूण हत्या रोकने में जिले के लोग दिलचस्पी नहीं लेते हैं। भ्रूण हत्या रोकने को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नंबर पर कोई कॉल नहीं आते हैं। बीते पांच सालों में महज एक कॉल आए है, वो भी गैर-कानूनी तरीके से चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र को जानकारी देने के बारे में। जबकि कन्या भ्रूण हत्या की जानकारी देने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार दो बार प्रोत्साहन राशि में इजाफा कर चुकी है।
दरअसल, दक्षिण हरियाणा में गिरते लिंगानुपात से राज्य और केंद्र सरकार दोनों चिंतित है। हाल ही में एक निजी अस्पताल के कार्यक्रम में शिरकत करने आए हरियाणा के मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर लिंगानुपात की बदतर हालत पर चिंता जाहिर की थी और इसमें अल्ट्रासाउंड केंद्रों के साथ माता-पिता की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। साथ ही आम लोगों से अपील की थी कि वो कन्या भ्रूण हत्या के बारे में सूचना दें।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गिरते लिंगानुपात के पीछे कन्या भ्रूण हत्या की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्रामीण इलाके में कन्याभ्रूण हत्या होने की अधिक संभावना जताई जाती है। बीते एक महीने में जिले में चार भ्रूण भी मिले है। बता दें कि पिछले साल गैर-कानूनी तरीके से चल रहे पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों को पकड़ने के लिए गुड़गांव में स्वास्थ्य निदेशालय ने छापेमारी कर बड़ी संख्या में मशीने पकड़ी थी।
नहीं मिलती है सूचना
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लैंडलाइन नंबर 0124-2322412 नंबर जारी है। जिस पर कोई भी व्यक्ति कन्या भ्रूण हत्या की जानकारी दे सकता है। लेकिन, बीते पांच सालों में इस बाबत कोई गुप्त सूचना नहीं मिली है। केवल पटौदी के एक आदमी द्वारा गैर-कानूनी तरीके से अल्ट्रासाउंड केंद्र चलाने की सूचना दी गई थी।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉक्टर सरयू शर्मा कहती है विभाग अपने स्तर पर छापेमारी करती है, लेकिन कन्या भ्रूण हत्या के बारे में कोई सूचना नहीं मिलती है। गर्भवती ग्रामीण महिलाओं पर आशा वर्करों के जरिए नजर रखने की तैयारी की जा रही है। उन महिलाओं पर खास ध्यान होगा, जिनके पहले से एक या दो बेटी है।
कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए प्रदेश में प्रसव पूर्व गर्भाधान तथा प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एवं पीएनडीटी) अधिनियम लागू है। गुप्त सूचना देने वाले को 2003 से बीस हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान था। जुलाई 2014 में प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन भी ऐसे व्यक्ति को 21 हजार रुपये इनाम देती है।
कोड में चलता है लिंग जांच का खेल
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो अल्ट्रासाउंड केंद्र लिंग जांच करने वाले अब कोड का इस्तेमाल करने लगे हैं। मसलन, मंडे को आ जाना यानी गर्भ में लड़का है। फ्राइडे को आना यानी गर्भ में लड़की है।
इसी तरह दो फोटो केंद्र पर लगी होती है एक सरस्वती जी की और दूसरा गणेश जी का। सरस्वती की तरफ इशारे का मतलब लड़की और गणेश जी के तरफ इशारा यानी लड़का है। इसके बाद दवा और गर्भपात करा लिया जाता है।
सिविल सर्जन डॉ. पुष्पा बिश्नोई: गर्भवती महिलाओं को ट्रैक करने के प्रयास किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी महिलाओं से आशावर्कर तथा एएनएम संपर्क में रहेगी और उन्हें विश्वास में लेकर ऐसे अल्ट्रासाऊंड केंद्रो का पता लगाएंगी जहां पर भ्रूण के लिंग की पहचान के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन का इस्तेमाल हो रहा है। छापा मारकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सूचना देने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी गुप्त रखी जाएगी।