अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राजधानी के कई इलाकों में सालभर पेयजल संकट बना रहता है। खास तौर पर दक्षिण दिल्ली की सबसे बड़ी कॉलोनी संगम विहार और उसके आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोग सिर्फ गर्मी में ही नहीं, बल्कि सर्दियों में भी पानी के लिए तरसते हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई इलाकों में रोजाना पानी की सप्लाई के बजाय हफ्ते में सिर्फ एक दिन टैंकर आता है। ऐसे में लोग पूरे हफ्ते की जरूरत का पानी एक ही दिन में जमा करने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासियों ने कहा कि टैंकर आने वाले दिन उन्हें अपने सभी कामकाज छोड़कर सुबह से ही सड़क किनारे खड़ा रहना पड़ता है। टैंकर कब आएगा, इसकी कोई तय समय-सारिणी नहीं होती। कभी सुबह, तो कभी देर शाम टैंकर पहुंचता है। कई बार तो टैंकर आता ही नहीं, जिससे लोगों को मजबूरी में बाजार से पानी खरीदना पड़ता है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया है।
संगम विहार निवासी रमेश कुमार बताते हैं कि हमारे इलाके में हफ्ते में एक दिन टैंकर आता है। उसी दिन हमें पूरे हफ्ते का पानी भरना पड़ता है। अगर टैंकर नहीं आया, तो 50-60 रुपये की बोतल खरीदकर पीने का पानी लेना पड़ता है। वहीं, गृहिणी सुनीता देवी कहती हैं कि सुबह से बाल्टी और ड्रम लेकर लाइन में खड़े रहो, तब कहीं जाकर पानी मिलता है। बच्चों की पढ़ाई और घर के बाकी काम सब छूट जाते हैं।
केवल संगम विहार ही नहीं, बल्कि देवली, तिगड़ी, महरौली, ओखला, बदरपुर और छतरपुर जैसे इलाकों में भी पानी की समस्या गंभीर बनी हुई है। कई जगहों पर पाइपलाइन तो है, लेकिन नियमित सप्लाई नहीं होती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टैंकर व्यवस्था में भी पारदर्शिता नहीं है। कई बार टैंकर चालक कुछ खास लोगों को पानी दे देते हैं, जबकि बाकी लोगों को इंतजार करना पड़ता है।
दिल्ली जल बोर्ड समय-समय पर समस्या के समाधान के दावे करता हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में लोगों को अब भी राहत नहीं मिल पाई है। कई इलाकों के निवासियों ने मांग की है कि स्थायी पाइपलाइन व्यवस्था को मजबूत किया जाए और नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें टैंकरों के भरोसे न रहना पड़े। सर्दी हो या गर्मी, पानी इंसान की बुनियादी जरूरत है। लेकिन दिल्ली के हजारों परिवारों के लिए यह जरूरत आज भी एक संघर्ष बनी हुई है। जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, तब तक लोगों को हर हफ्ते पानी के लिए लाइन में खड़े होकर अपनी प्यास बुझानी पड़ेगी।