उद्यमियों को इस बार लाइसेंस फीस जमा कराने में परेशानी हो रही है। उद्यमियों की तरफ से दी गई जानकारियों को नगर निगम मानने के लिए तैयार नहीं है। वहीं, निगम प्रशासन उद्यमियों पर 12 से 18 फीसदी तक जुर्माना लगाने की तैयारी में जुटा है। डिप्टी मेयर मनमोहन गर्ग का कहना है कि इस समस्या के बारे में निगमायुक्त सोनल गोयल से चर्चा की जा चुकी है। उम्मीद है कि जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।
बता दें कि जिले में पंजीकृत करीब 15000 छोटे बड़े उद्योगों को हर साल लाइसेंस रिन्यूवल कराने के लिए उद्योग के टर्नओवर के हिसाब से शुल्क जमा कराना होता है। उद्यमी हर साल मार्च के अंतिम सप्ताह तक अपने-अपने कंपनियों के टर्नओवर की सूची निगम के कराधान विभाग को उपलब्ध करा देता था और लाइसेंस फीस जमा कराई जाती थी।
इस बार निगम प्रशासन ने सूची लेने से इनकार कर दिया है। उद्यमियों का कहना है कि लाइसेंस रिन्यूवल के दौरान फायर और प्रदूषण समेत अन्य विभागों की एनओसी भी मांगी जा रही है। जबकि उद्योग लगाने के दौरान एनओसी जमा कराई जा चुकी है।
उधर, डिप्टी मेयर मनमोहन गर्ग ने बताया कि उनके पास उद्यमी समस्या को लेकर आए थे। इस बाबत निगमायुक्त से बात की जा चुकी है। क्योंकि 31 मार्च को ही बैलेंस सीट बनाना उद्यमियों के लिए संभव नहीं है। इसे तैयार कराने में 3-4 महीने का वक्त लगता है। उधर कराधान अधिकारी विजय सिंह का कहना है कि उद्यमी अपने उद्योग के टर्नओवर की सही जानकारी उपलब्ध करा लाइसेंस शुल्क जमा करा सकते हैं।
टर्न ओवर और निर्धारित लाइसेंस शुल्क वार्षिक:
50,000 रुपये 300 रुपये
100,000 रुपये 400 रुपये
10 लाख रुपये तक 700 रुपये
25 लाख रुपये तक 1200 रुपये
50 लाख रुपये तक 3000 रुपये
1 करोड़ रुपये तक 5000 रुपये
5 करोड़ रुपये तक 10000 रुपये
10 करोड़ रुपये तक 15000 रुपये
15 करोड़ रुपये तक 18000 रुपये
20 करोड़ रुपये तक 21000 रुपये
25 करोड़ रुपये तक 24000 रुपये
30 करोड़ रुपये तक 27000 रुपये
35 करोड़ रुपये तक 30000 रुपये
40 करोड़ रुपये तक 33000 रुपये
45 करोड़ रुपये तक 36000 रुपये
50 करोड़ रुपये तक 39000 रुपये आदि