दिल्ली की सड़कों पर पैदल चलने वाले भी सुरिक्षत नहीं है। सड़क दुर्घटना में घायल होकर डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंच रहे मरीजों में ऐसे लोगों की संख्या दूसरे नंबर पर है। हर साल अस्पताल की इमरजेंसी में घायल होकर करीब दो हजार मरीज पहुंचते हैं। इनमें सबसे ज्यादा दोपहिया वाहन चालक या राइडर हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि बाइक चलाते समय अधिकतर लोग हेलमेट का प्रयोग नहीं करते। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने वाले में ऐसे लोगों की तदात ज्यादा है। इसके अलावा घायल मरीजों के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में अधिकतर लोग सड़क पर चलने को मजबूर हैं। इन्हें सड़क पर चलते समय कार या दूसरे वाहन पीछे से टक्कर मार कर घायल कर दिया। इनमें काफी मरीज गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। कुछ मरीजों की इलाज के दौरान मौत तक हो गई।
अस्पताल के इमरजेंसी विभाग के प्रमुख व प्रोफेसर डॉ. अमलेंदु यादव ने बताया कि इमरजेंसी में बाइक राइडर घायल होकर पहुंचते हैं। इनमें से अधिकतर लोगों ने हेलमेट का प्रयोग नहीं किया था। इसके बाद पैदल चलने वाले लोगों की संख्या है। उनका कहना है कि यदि सड़क नियमों का पालन सख्ती से किया जाता है तो अधिकतर दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। काफी मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें बचाया जा सकता है।
ऊंचाई से गिर कर घायल हो रहे बच्चे
अस्पताल के इमरजेंसी में ऊंचाई से गिरकर घायल होने वाले मरीजों में बच्चों की संख्या ज्यादा है। अक्सर माता-पिता या अन्य बच्चों को छत, बालकनी व दूसरे जगहों पर छोड़ देते हैं। यह बच्चे खेलते-खेलते नीचे गिर जाते हैं। वहीं ऊंचाई से गिरने वालों में भवन निर्माण में लगे मजदूरों की संख्या भी काफी है।
बढ़ रहा है ब्लू टूथ इयरफोन का चलन
बाइक चलाते समय ब्लू टूथ इयरफोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सड़क दुर्घटना में घायल होकर एम्स के ट्रामा सेंटर, कश्मीरी गेट स्थित सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के ट्रामा सेंटर व सफदरजंग के आपातकालीन विभाग में आने वाले हर दूसरे मरीज में यह कारण दिख रहा है। डॉक्टरों की माने तो सिर की चोट के साथ भर्ती हुए अधिकतर मरीज ब्लू टूथ के कारण ध्यान भटकने के चलते दुर्घटना का शिकार पाए गए।