सीरिया में रसायनिक हमले में मारे गए और संघर्षरत क्षेत्रों में बच्चों पर हो रही हिंसा के विरोध में सोमवार को नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने शांति सभा आयोजित करते हुए शांति की अपील की। राजघाट में आयोजित इस शांति सभा में स्कूली बच्चों, धार्मिक नेताओं, सांसदों, सिविल सोसायटी, डॉक्टर व वकीलों आदि ने भाग लेते हुए सभी को आगे बढ़कर शांति के पथ पर काम करने का आह्वान किया।
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राजघाट पर बच्चों के साथ की शांति सभा
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कैलाश सत्यार्थी
राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर आयोजित शांति सभा में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि दुनिया को बचाने और अमन-शांति के लिए हम सबको एकजुट होना चाहिए। क्योंकि युद्ध और संघर्ष में सबसे अधिक परेशानी बच्चों व महिलाओं को होती है। उन्होंने कहा कि बच्चे कभी भी हिंसा, संघर्ष या युद्ध का कारण नहीं होते है। इसके बजाय वे ऐसी परिस्थितियों में सबसे अधिक नुकसान उठाते हैं।
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बच्चों के भविष्य को लेकर जताई चिंता
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कैलाश सत्यार्थी
उन्होंने कहा कि रासायनिक हमले से लेकर कई संघर्षरत देशों में लाखों-करोड़ों बच्चों का भविष्य अंधकार में है। हम सबको मिलकर इन बच्चों को बम, गोलीबारी और रासायनिक हमलों से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी पूरी करनी होगी। सत्यार्थी ने कहा, 'मैं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग करता हूं कि संघर्ष, शरणार्थी संकट, सीमा-पार तस्करी व गुलामी की इन स्थितियों में बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा पर लगाम लगाने के लिए हाईलेवल कमेटी या टीमों का गठन करें।'
दिव्यांग हुए बच्चों के लिए ठोस कदम उठाने की अपील
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कैलाश सत्यार्थी
इस दौरान सीरिया में रासायनिक हमले में मारे गए 27 बच्चे को याद करते हुए शांति सभा भी आयोजित की गई। इसी के साथ इस हमले की जद में आने से सैकड़ों दिव्यांग हुए बच्चों के लिए भी ठोस कदम उठाने पर चर्चा हुई।
बता दें कि यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में करीब ढाई सौ मिलियन बच्चे रहते हैं। जबकि दस हजार से अधिक बच्चे सीरियाई अरब गणराज्य में संघर्ष शुरू होने के बाद से मारे जा चुके हैं।