दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मौत का गम दिल्ली प्रदेश कांग्रेस पर भारी पड़ रहा है। शीला दीक्षित की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट के चलते 20 जुलाई को 2019 हो गई थी। कहा जाता है कि शीला दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव पीसी चाको के व्यवहार से भारी मानसिक तनाव में थी।
शीला को प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन का व्यवहार भी तंग कर रहा था। इसको लेकर शीला दीक्षित ने यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर शिकायत की थी। इस पर गुरुवार को संसद भवन परिसर में दिल्ली के प्रभारी महासचिव पीसी चाको ने सफाई दी है।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में चाको ने कहा
दिल्ली के प्रभारी महासचिव पीसी चाको संसद भवन के मुख्य द्वार से बाहर निकल रहे थे। शीला दीक्षित की अचानक मृत्यु के बारे में और कारणों की तरफ ध्यान ले जाने पर पीसी चाको हडबड़ा गए।
चाको से यह पूछने पर कि क्या शीला दीक्षित के कदम उठाने के ठीक अगले दिन आपके द्वारा उनके निर्णय को निरस्त कर देना, क्या सही कहा जाएगा तो पीसी चाको ने कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है।
चाको ने कहा कि एक प्रभारी महासचिव को जो करना चाहिए उन्होंने वही किया है। राजनीति में अपना धर्म निभाया है। चाको से शीला दीक्षित द्वारा यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को लिखे पत्र के बारे में भी पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें वह क्या कर सकते हैं?
चाको ने कहा कि यह पत्र किसने लीक किया? आप बताइए क्या ऐसा होना चाहिए? एक नेता द्वारा दूसरे नेता को लिखा पत्र लीक होने का क्या मतलब है? चाको से सवाल हुआ कि वह शीला की अचानक मृत्यु पर अपनी शोक संवेदना देंगे तो इसके जवाब में कांग्रेस महासचिव ने कोई जवाब नहीं दिया और चले गए। इस मुद्दे पर बातचीत करते समय चाको काफी असहज से दिखाई दे रहे थे।
क्या है मामला
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री का 20 जुलाई को हृदयाघात से मृत्यु हो गई थी। कहा जाता है कि शीला भारी तनाव में थीं। उनके तनाव का एक कारण दिल्ली प्रदेश के प्रभारी महासचिव पीसी चाको और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन को भी माना जा रहा है।
यह चर्चा प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की जुबान पर है। शीला दीक्षित ने इस संबंध में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अजय माकन पर आरोप लगाया था कि वह कांग्रेस महासचिव पीसी चाको को लगातार भ्रमित कर रहे हैं।
इससे दिल्ली प्रदेश कांग्रेस को खड़ा करने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। शीला दीक्षित ने इस संदर्भ में सोनिया गांधी से जांच कराकर सच का पता लगाने का आग्रह भी किया था।
इस चर्चा से न केवल दिल्ली प्रदेश कांग्रेस दो-चार हो रही है, बल्कि शीला दीक्षित के पुत्र और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित भी काफी आहत हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी ने इसके बाबत अभी कोई कदम नहीं उठाया है।