आज विश्व हृदय दिवस है। हर साल पूरी दुनिया में इसे मनाया जाता है, क्योंकि विश्व में सबसे ज्यादा मौतें हृदय संबंधी बीमारियों से ही होती हैं। भारत में 13 करोड़ लोग हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं।
इसमें 25 से लेकर 60 वर्ष तक की आयु वाले शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दुनिया में हर दिन हृदय संबंधी बीमारी से 9 हजार लोगों की मौत हो रही है यानी हर 10 सेकेंड में एक मौत। दिल्ली में हृदय रोगियों की संख्या 20 लाख के आसपास है।
डॉक्टरों की मानें तो युवाओं को भी हार्ट अटैक होने की आशंका देखने को मिल रही है। इसकी वजह कई हैं, लेकिन जागरूकता ही बड़ा उपचार माना जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर वर्ष 2 लाख हार्ट सर्जरी की जा रही हैं। 2016 के दौरान 1 लाख 75 हजार हार्ट सर्जरी की गई थीं। 2015 में हार्ट सर्जरी करीब 1 लाख 20 हजार हुई थीं। इससे जाहिर है कि देश में कितनी तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
क्या कहती है रिसर्च
हाल ही में एक रिसर्च सामने आई है ‘लैन्सेट-2017’। कई देशों पर हुए अध्ययन के अनुसार, हार्ट केयर को लेकर विश्व में भारत काफी पिछड़ा है, यहां इलाज सस्ता है। बावजूद इसके 195 देशों की सूची में भारत 154वें नंबर पर है।
सरकार कुल बजट का महज 5 फीसदी ही हार्ट केयर पर खर्च कर रही है। उपचार की बात करें तो 18 फीसदी शहरी और 14 फीसदी ग्रामीण ही प्राइवेट और सरकारी बीमा के दायरे में आते हैं। बाकी लोग सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं।
मुफ्त में मिलेगा परामर्श
दिल्ली के बत्रा अस्पताल ने हृदय रोगियों के लिए मुफ्त में परामर्श देने की व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत अस्पताल की ओर से हार्ट हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। यह नंबर है 9953363343। इस पर कॉल करने के बाद परामर्श, कार्डियोलोजिस्ट की देखरेख और एंबुलेंस सुविधा मुफ्त में मिलेगी। साथ ही नंबर पर मेसेज या व्हाट्सऐप के जरिये मरीज अपना रिकॉर्ड भी भेज सकता है। यह सब मरीज के लिए मुफ्त होगा।
बढ़ते हृदय रोगियों पर जताई चिंता
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भारत में पहली बार 90 के दशक में स्टेंट लगाने वाले डॉ. उपेंद्र कौल ने बढ़ते हृदय रोगियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि केवल 6 प्रतिशत दिल के मरीजों को ही एंबुलेंस सुविधा मिल पाती है, जबकि 57 प्रतिशत कार या अन्य निजी व किराये के वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
वहीं करीब 37 प्रतिशत मरीज सार्वजनिक वाहनों से अस्पताल पहुंचते हैं। यह भी दिल के मरीजों के मौत के आंकड़े बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। मधुमेह, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों की रोकथाम और जीवनशैली पर नियंत्रण रखें। साथ ही समय- समय पर मेडिकल जांच जरूर करा लें।-डॉ. केके अग्रवाल, अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
45 फीसदी दिल के दौरे चुपचाप पड़ते हैं। जरूरी नहीं है कि सीने में दर्द या सांस में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें, इसलिए हर रोगी को इकोकार्डियोग्राम टेस्ट कराना चाहिए। इससे बीमारी की स्थिति पता चल जाती है।-डॉ. हेमंत मदान, एडिशनल डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पिटल
हृदय रोग का स्थायी उपचार संभव नहीं है, लेकिन शुरू में इलाज से इसके लक्षणों पर काबू पाया जा सकता है।-डॉ. वीके दूबे, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, वेंकटेश्वर अस्पताल
एक नजर
31 फीसदी लोगों की मौत सालाना कार्डियो वास्कुलर रोग से
5 में से एक पुरुष और 8 में से एक महिला की कॉर्नरी हॉर्ट डिजीज से मौत
20 लाख लोग अकेले दिल्ली-एनसीआर में हैं बीमार