दरियागंज में करीब तीन बीघे में नहर वाली हवेली हुआ करती थी। इसका एक तिहाई हिस्सा परवेज की मां जरीन को उनकी नानी से मिला था। लेकिन देश के बंटवारे के बाद वह करीब चार साल की उम्र में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान चले गए।
कारगिल युद्ध के खलनायक जनरल परवेज मुशर्रफ को 2001 में उसकी जन्मभूमि देखने की आतुरता दिल्ली खींच लाई थी। परवेज मुशर्रफ दरियागंज में वह जगह देखने आए थे, जहां उसका जन्म हुआ था। कभी नहर वाली हवेली के नाम से मशहूर यह जगह अब प्रताप स्ट्रीट के नाम से जानी जाती है। लेकिन यहां के वाशिंदे नहीं चाहते कि कोई कहे कि पाकिस्तान का तानाशाह मुशर्रफ यहां पैदा हुआ था।
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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का लंबी बीमारी के बाद रविवार को निधन हो गया। वह दुबई के एक अस्पताल में भर्ती थे। 79 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनका जन्म 11 अगस्त 1943 को दरियागंज में हुआ था।
देश के विभाजन के बाद उनका परिवार कराची जाकर बस गया। 1961 में मुशर्रफ पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए और बाद में वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख और राष्ट्रपति बने। उन्होंने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पद से हटा कर सत्ता की बागडोर खुद संभाल ली थी।
भारत-पाकिस्तान के बीच अप्रैल-जून 1999 तक हुए करगिल युद्ध के दौरान परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के सेना प्रमुख थे। इस युद्ध में पाकिस्तान को दुनिया के सामने शर्मिंदा होना पड़ा। लेकिन उन्होंने भारत को कई ऐसे जख्म दिये, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। 1965 में उन्होंने अपने जीवन का पहला युद्ध भारत के खिलाफ लड़ा। इसके लिये उन्हें पाकिस्तान सरकार ने वीरता पुरस्कार दिया। उनके नेतृत्व में 1971 में हुए दूसरे भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान को हार मिली।
करीब चार साल की उम्र में छोड़ दिया भारत
दरियागंज में करीब तीन बीघे में नहर वाली हवेली हुआ करती थी। इसका एक तिहाई हिस्सा परवेज की मां जरीन को उनकी नानी से मिला था। लेकिन देश के बंटवारे के बाद वह करीब चार साल की उम्र में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान चले गए। बाद में इस हवेली के छोटे-छोटे हिस्से स्थानीय लोगों ने खरीदे और अपने मकान बनाकर यहां रह रहे हैं। प्रताप स्ट्रीट में करीब 25-26 परिवार रहते हैं।
परवेज मुशर्रफ को इतना भाव देने की जरूरत नहीं
परवेज मुशर्रफ देश का दुश्मन था, उसे इतना भाव देने की जरूरत नहीं है, उसका यहां से कोई लेना देना नहीं, उसके पूर्वज यहां से अपनी जमीन जायदाद बेचकर गए थे।- जावेद खान, प्रताप स्ट्रीट(दरियागंज)
परवेेज मुशर्रफ की मां 2005 में यहां आई थीं, वह पहचान नहीं पाईं कि कौन सी जगह थी, जहां परवेज का जन्म हुआ। हमारे पिता ने 1961 में यह जगह खरीदी, जिसमें छह परिवार रहते हैं।- देविन्दर कुमार जैन, प्रताप स्ट्रीट (दरियागंज)
बताते हैं कि परवेज की नानी का घर यहां था, जिसका एक हिस्सा उनकी मां को मिला था, 2001 से पहले उन लोगों को नहीं पता था कि यहां कभी परवेज मुशर्रफ का जन्म भी हुआ था।- कंवर सिंह, प्रताप स्ट्रीट (दरियागंज)