दिल्ली हाईकोर्ट से 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द होने के बाद अब आम आदमी पार्टी (आप) की नजर केंद्रीय चुनाव आयोग के फैसले पर टिक गई है। पार्टी का मानना है कि यहां से फैसला उनके हक में जा सकता है।
एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, जब नियुक्तियां ही वैध नहीं हैं तो उस आधार पर विधायकों की सदस्यता कैसे रद्द हो सकती है। हालांकि, पार्टी अभी इस मामले में खुलकर बोलने से बच रही है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग में सुनवाई जारी होने से इस पर ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं।
आयोग हर पक्ष को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाएगा। जानकारों का मानना है कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति अवैध होने के बाद वे लाभ के पद के दायरे में ही नहीं आ सकते। हां यदि नियुक्ति सही मानी जाती तो जरूर इनके लिए सदस्यता तक जाने का खतरा बन जाता।
बीते साल मई में दिल्ली सरकार ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की थी। इससे मामले में विवाद शुरू हो गया। इसके बाद दिल्ली सरकार विधायकों के बचाव में उतर आई।