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Parliament Security Breach: संसद की सुरक्षा में सेंध के आरोपी नीलम-महेश को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी जमानत

Wed, 02 Jul 2025 11:42 AM IST
विजय पुंडीर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए साफ कहा है कि दोनों आरोपियों को मीडिया को साक्षात्कार नहीं दे सकते और न ही घटना से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट डाल सकते हैं। 
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Parliament Security breach case - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को 2023 के संसद सुरक्षा चूक मामले में आरोपियों नीलम आजाद और महेश कुमावत को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 50,000 रुपये की जमानत पर रिहाई दी जा रही है लेकिन आरोपियों को प्रेस या सोशल मीडिया के सामने साक्षात्कार देने या मामले के बारे में कोई बयान देने की अनुमति नहीं होगी। वे दिल्ली नहीं छोड़ेंगे और हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होंगे।

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इससे पहले, पटियाला हाउस कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) हरदीप कौर ने आजाद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। यह मामला उस घटना से संबंधित है जिसमें कुछ व्यक्तियों ने लोकसभा सत्र के दौरान संसद भवन में प्रवेश कर धुआं छोड़ने वाले कनस्तर फेंके थे।

नीलम आजाद को दिल्ली पुलिस ने 13 दिसंबर, 2023 को तीन अन्य आरोपियों - सागर शर्मा, मनोरंजन डी और अमोल शिंदे के साथ गिरफ्तार किया था। जहां नीलम आजाद और अमोल शिंदे संसद भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं सागर शर्मा और मनोरंजन डी ने दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में प्रवेश कर धुआं छोड़ने वाले कनस्तर फेंके थे। बाद में, पुलिस ने कथित साजिश के मास्टरमाइंड ललित झा और सह-आरोपी महेश कुमावत को भी गिरफ्तार किया। हाई कोर्ट में, आरोपी विशेष एनआईए कोर्ट द्वारा जमानत से इनकार को चुनौती दे रहे हैं।
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नीलम आजाद ने दलील दी कि वह संसद के अंदर किसी आतंकवादी कृत्य की साजिश का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि केवल सामाजिक मुद्दों और बेरोजगारी संकट को उठाना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वह हरियाणा की एक शिक्षित महिला हैं, जो एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करती हैं। इससे पहले, हाईकोर्ट ने नीलम आजाद द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया था।

क्या था पूरा मामला
मामला 2023 का है, जिस दिन संसद पर हुए आतंकवादी हमले की बरसी भी थी। लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सागर शर्मा और मनोरंजन डी दर्शक दीर्घा से नीचे सदन में कूद गए थे। उन्होंने जूते से स्मोक कैन निकालकर पीली गैस छोड़ी और नारेबाजी की। लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम आजाद ने संसद परिसर के बाहर रंगनी गैस छोड़ी और नारेबाजी की। आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। 
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