स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से दिल्ली की सुबह दहशत भरी रही। बच्चों को स्कूल भेजने के थोड़ी देर बाद ही हर तरफ हड़कंप मच गया। अफरा-तफरी भरे माहौल में स्कूलों के अंदर से बच्चों की रोने की आवाज भी सुनाई पड़ी। सूचना मिलने पर हैरान-परेशान अभिभावक स्कूलों की तरफ भागे।
सभी को फिक्र अपने बच्चों की थी। बच्चों को सामने सुरक्षित देखकर आंखों से आंसू छलक पड़े। बच्चों से मुलाकात होने के बाद ही सभी ने चैन की सांस ली। वहीं, आनन-फानन में स्कूलों को खाली कराने के बाद भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दोपहर तक तलाशी अभियान चलाया गया। धमकी भरा ई-मेल फर्जी होने की तसल्ली कर लेने के बाद ही पुलिस लौटी।
इससे पहले सुबह स्कूल खुलने के बाद सिलसिलेवार ढंग से धमकी भरे ई-मेल ईमेल से स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। इसकी सूचना मिलने के बाद स्कूलों से लेकर आवासीय कॉलोनियों तक अफरा-तफरी का माहौल दिखा। स्कूलों के बाहर अभिभावक हताश, निराश व चीख-पुकार करते दिखे। हर कोई बच्चों की एक झलक पाने के लिए बेताब नजर आया। छोटे बच्चों से लेकर बड़े छात्रों के बीच डर का माहौल साफ देखा गया। हर कोई बस यही दुआ कर रहा था कि बच्चे सुरक्षित मिल जाएं। अपने बच्चों को लेने के लिए कई अभिभावक ऑफिस से लौटे, तो कई बीच रास्ते से ही स्कूल पहुंचते दिखे। खासकर छोटे बच्चों के अभिभावक रोते-बिलखते हुए स्कूल परिसर के अंदर दाखिल होते नजर आए। हालांकि, उन्हें पूछताछ के बाद ही स्कूल परिसर में प्रवेश दिया जा रहा था। स्कूलों के बाहर पुलिस की कड़ी तैनाती दिखी। स्कूल प्रबंधक अंदर बच्चों को सुरक्षित जगह पर ले गए। भागमभाग के बीच अभिभावकों को सुकून इस बात का मिला कि सभी स्कूलों में बम की फर्जी ईमेल व कॉल थी।
डॉग स्क्वाड को देखकर मन घबरा गया
आरके पुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के बाहर अभिभावकों के साथ मायूस होकर घर जा रहे अंकित सिंह ने बताया कि वह कक्षा में बैठे थे। गणित की कक्षा चल रही थी, लेकिन अचानक नीचे से आवाज आई कि सभी बच्चों को ग्राउंड में लाया जाए। देखते ही देखते पुरा स्कूल ग्राउंड में आ गया। कुछ ही देर में स्कूल के अंदर भारी पुलिस बल आता दिखा। इससे मन घबरा गया। कुछ देर में ही डॉग स्क्वाड ने पूरे स्कूल की तलाशी ली। इसके बाद स्कूल को सुरक्षित घोषित किया गया।
बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी बाहर
प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के बीच सबसे अधिक डर का माहौल था। उन्हें संभाल पाना भी स्कूल प्रबंधन के लिए मुश्किल हो रहा था। स्कूल प्रबंधन उन्हें गर्मी के कारण चलते छुट्टी होने की बात कर रहे थे, ताकि बच्चे पैनिक न हों। उधर, लोदी स्टेट स्थित दिल्ली कन्नड़ शिक्षण संस्थान के अंदर से छोटे बच्चों के रोने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। बच्चे अभिभावकों के पास जाने की जिद कर रहे थे। हालांकि, उन्हें अंदर लंच और खाने का सामान दिया जा रहा था। बच्चों को लेकर आए राहुल सिंह ने बताया कि उनका घर द्वारका में है और बच्चे लोदी स्टेट में पढ़ते हैं। पहले तो वह इतना घबरा गए, लेकिन जैसे-तैसे वह यहां पहुंचे। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को धूप में बैठा रखा था। उन्हें सूचना स्कूल के व्हाट्सएप समूह के माध्यम से मिली थी। जैसे ही उनके बच्चे दिखे तो राहत की सांस ली।
रिश्तेदारों व कैब चालकों को नहीं दिए बच्चे
बम की सूचना मिलने के बाद कई अभिभावक ऑफिस में होने से समय पर स्कूल नहीं पहुंच सके। ऐसे में कई अभिभावकों ने रिश्तेदारों व पड़ोसियों को बच्चों को लेने के लिए भेजा था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने रिश्तेदारों व पड़ोसियों को बच्चों को नहीं सौंपा, जो भी अभिभावक स्कूल आए उनका पहचान पत्र देखकर ही उन्हें बच्चे दिए जा रहे थे। आलम यह था कि स्कूल कैब चालकों को भी बच्चे नहीं दिए जा रहे थे। कन्नड स्कूल में भतीजों को लेने आए दीपक डागर ने बताया कि उनके दो भतीजे स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन बच्चे नहीं सौंप रहे हैं। प्रबंधन का कहना है कि बच्चे केवल अभिभावकों के साथ ही जाएंगे। बच्चों के माता-पिता दिल्ली से बाहर गए हैं।
कई बच्चों को शिक्षकों ने पहुंचाया घर
जिन छात्रों के अभिभावक बच्चों को स्कूल लेने नहीं आ पा रहे थे, उन्हें शिक्षकों ने घर तक छोड़ा। कई शिक्षक प्राथमिक स्कूल के छात्रों को अपनी गोद में उठाते हुए स्कूल परिसर के बाहर ले जाते दिखे तो कुछ बच्चों को समझाते दिखे कि डरो मत सब ठीक है। लोदी रोड स्थित एक निजी स्कूल शिक्षक परवेश जांगड़ा ने बताया कि कक्षा में 38 छात्र पढ़ते हैं। छात्रों के अभिभावकों को बम की सूचना मिलते ही जानकारी दे दी गई थी। ऐसे में अभिभावक आनन-फानन में बच्चों को स्कूल में लेने आए। जिन छात्रों के माता-पिता नहीं आए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। चार छात्रों के अभिभावक अपने बच्चों को जरूरी काम के कारण लेने नहीं आ पाए तो कुछ शहर से बाहर थे। हमने इन छात्रों को घर छोड़ा।
बस मेरा हाथ पकड़े रहना
गोल मार्केट स्थित एक स्कूल के छठी में पढ़ने वाले छात्र आयुष ने बताया कि माता-पिता शहर से बाहर काम करते हैं। ऐसे में वे आने में असमर्थ थे। उनके शिक्षक ने बताया कि डरने की जरूरत नहीं है, कुछ नहीं होगा। सब ठीक है। बस तुम कहीं इधर-उधर मत भागना मेरा हाथ पकड़े रहना। शिक्षक गोद में उठाकर गाड़ी तक लाए। अब घर ले जा रहे हैं।
30 से 40 मिनट में स्कूल खाली कराए
स्कूलों ने बिना आपा खोए तीस से चालीस मिनट में बच्चों को बाहर निकाल दिया। इसके लिए स्कूलों ने पहले से तैयार निकासी योजना का सहारा लिया। बच्चों को स्कूल परिसर में बम होने की धमकी की सूचना नहीं दी गई, बल्कि कहा गया कि मॉकड्रिल कराई जा रही है। बच्चों को बाहर लाने के बाद उन्हें स्कूल से ले जाने के लिए अभिभावकों, वैन व बस चालकों को सूचना दी गई।
सुबह 9.04 बजे मिला ई-मेल
मौसम विहार स्थित डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल वंदना कपूर ने बताया कि आठ बजे स्कूल खुलने के बाद ईमेल देखा। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। अभिभावकों को फोन व मैसेज किए गए। बच्चे दहशत में ना आए और भगदड़ ना हो इसके लिए बच्चों को मॉकड्रिल के बहाने बाहर निकाला गया। इस दौरान 30 से 40 मिनट ही लगे। वहीं, मयूर विहार स्थित विद्या बाल भवन स्कूल को भी ईमेल मिला। स्कूल प्राचार्य डॉ. सतबीर शर्मा ने बताया हमें सुबह 9.04 मिनट पर ईमेल मिला। इसके बाद सभी कक्षाओं से बच्चों को बाहर निकलने की घोषणा की गई। बच्चों को स्कूल के मैदान में 10-15 मिनट में ले आए। बच्चों को बम के संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई। पुलिस को फोन कर स्कूल ऐप के जरिये अभिभावकों को संदेश भेजे गए। करीब आधे घंटे में आधे से ज्यादा स्कूल को खाली कराया गया।
जानें क्या बोले अभिभावक
घर में काम कर रहा था। अचानक नजर टीवी पर नजर गई। स्कूलों में बम होने की सूचना मिलने की खबर चल रही थी। घबराहह में फौरन स्कूल की ओर दौड़ा। रास्ते में करीब सुबह 10:30 बजे जब स्कूल से इससे संबंधित मैसेज आया तो बेचैनी और बढ़ गई। स्कूल पहुंचकर बच्चों से मिलने के बाद ही राहत की सांस ली। खुशी इस बात की है कि प्रिंसिपल व शिक्षक सभी बच्चों को बाहर तक छोड़ रहे थे।
-धर्मेंद्र कुमार, अभिभावक, डीटीईए सीनियर सेकेंड्री स्कूल
मैं बैटरी रिक्शा चलाता हूं। जब काम पर था तो कुछ साथी बम होने की सूचना की बातें कर रहे थे। शुरू में लगा कि ये सब अफवाहें हैं। जब गुजरती गाड़ियों में बच्चों को जाते देखा, तो मैं भी फौरन स्कूल के लिए निकल पड़ा। स्कूल से कॉल-मैसेज न आने की शिकायत करने पर उन्होंने जानकारी दी कि पैनिक के माहौल को कम करने के लिए धीरे-धीरे बच्चों को घर भेजा जा रहा था।
-मोनू, अभिभावक, अटल आदर्श बाल विद्यालय
बच्चों के अभिभावकों में सबसे पहले खबर मुझे ही मिली थी। जब स्कूल पहुंची तो गेट पर मना कर दिया गया कि ऐसा कुछ नहीं है। सब अफवाह हैं। कुछ देर इंतजार करने के बाद दूसरे अभिभावक भी गेट पर आ खड़े हुए। तब जाकर प्रवेश मिला। बच्चों को सुरक्षित देखकर खुशी हुई।
-दीपा, अभिभावक, अटल आदर्श बाल विद्यालय
सूचना मिलते ही जब दुकान बढ़ाकर स्कूल पहुंचा तो गेट पर लंबी लाइन नजर आई। गेट से सभी अपने-अपने बच्चों के नाम, कक्षा और रोल नंबर पर्ची में लिखकर अंदर भेज रहे थे। इसके बाद ही बच्चों को बाहर आने दिया जा रहा था। सड़कों पर जाम देखकर घबराया, लेकिन बच्चे आ गए हैं, इसकी खुशी है।
-योगेश, अभिभावक, राजेंद्र नगर सेंट कोलंबस स्कूल