हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा नर्सरी दाखिला के लिए उम्र तय करने के मुद्दे पर सरकार के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया है। अदालत ने कहा कि आपको यह तय करने का अधिकार किसने दिया है। अदालत का मानना है कि यह अधिकार उपराज्यपाल के पास है। वहीं सरकार ने अपने फैसले को उचित बताया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने नर्सरी दाखिलों के लिए दिल्ली सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों को चुनौती संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार के इन निर्देशों की कोई कानूनी वैधता ही नहीं है, क्योंकि यह उपराज्यपाल द्वारा जारी नहीं किए गए।
अदालत ने कहा कि 2007 में उपराज्यपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार निजी स्कूल नर्सरी दाखिलों में अपनी गाइडलाइन तय करने के लिए स्वतंत्र है।
अदालत ने कहा की यह अभिभावकों की मर्जी है कि वे उसे किस उम्र में दाखिला दिलाते हैं। अदालत ने कहा की सरकार के गत 18 दिसंबर 2015 को उम्र संबंधी निर्देशों के जारी करने से सभी को काफी हैरानी हुई है। माता-पिता को तो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए कोई योजना बनाने के लिए समय ही नहीं मिला।