2014 के आसपास प्राधिकरण ने शासन को पत्र लिखकर कहा कि गांवों का विकास कराने का काम प्राधिकरण कर रहा है। कई बार होता है कि किसी कार्य को प्राधिकरण ने करा दिया तो पंचायत व्यवस्था के तहत उसी कार्य को कागजों में कराकर हेराफेरी भी होती है। इसलिए प्राधिकरण क्षेत्र में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था (ग्राम प्रधान, बीडीसी व पंचायत सदस्य) समाप्त होनी चाहिए। प्रदेश सरकार ने बिना देरी किए व्यवस्था खत्म कर दी। लोगों ने काफी विरोध किया और मामला कोर्ट में भी गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
कंगाली में प्राधिकरण, कैसे हो विकास
किसान नेता चौधरी विहारी सिंह ने कहा कि प्राधिकरण ने गांव के लोगों के अधिकारों को छीना है। पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह व पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता जैसे अधिकारी नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में घोटाले कर गए। प्राधिकरण को कंगाल बना दिया। ऐसे में अब विकास कहां से हो सकेगा। यही कारण है कि गांवों की जमीन पर प्रॉपर्टी डीलर
व भूमाफिया की नजर पड़ गई। जिसने जहां चाही, जमीन खरीदी और मन मुताबिक निर्माण करा दिया।
यदि पंचायत व्यवस्था होती तो निश्चित ही अवैध निर्माण पर रोक लगती। ग्रामप्रधान, बीडीसी व पंचायत सदस्यों की दखलंदाजी होती तो नियमों की अनदेखी करनी सहज नहीं होती। गांव के नक्शा समेत अन्य कार्य पंचायत से ही पास होते हैं। खिलवाड़ कर रहे हैं।