पंचायत चुनाव में विकास से अछूते गांव में विकास सिर्फ कोरा मुद्दा दिखाई देता है। राष्ट्रीय राजमार्ग से मात्र तीन किलोमीटर दूर भनकपुर गांव में आज भी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।
मीठे पानी के लिए लोगों को दूरदराज के गांवों पर निर्भर रहना पड़ता है। पानी के लिए अधिकारियों के यहां गुहार लगाकर थक चुके ग्रामीण अब नई पंचायत से काफी उम्मीदें लगा रहे हैं।
करीब 5500 आबादी के जाट बाहुल्य गांव भनकपुर 1964 में करनेरा गांव से अलग हो स्वतंत्र पंचायत के रूप अस्तित्व में आया। गांव के लोगों की बाबा मस्तराम में असीम आस्था है।
जीटी रोड से मात्र तीन किलोमीटर की सड़क जर्जर हो चुकी है। सरकारी स्कूल में आसपास के गांव के बच्चे पढ़ाई करने आते हैं लेकिन गांव के लोगों को पानी की दिक्कत है।
धरना-प्रदर्शनों के बाद सरकार ने लोगों की मांग मानते हुए फतेहपुर बिल्लौच के पास आगरा केनाल के नजदीक ट्यूवबेल लगाया और सीधा कनेक्शन गांव के हर घर में दिया लेकिन सब बेकार साबित हो रहा है।
प्लास्टिक की लाइन होने के कारण आए दिन यह लाइन टूटी रहती है। इसके कारण गंदा पानी लाइनों से घरों में पहुंच जाता है। इसलिए अब लोगों ने इस लाइन के पानी को उपयोग में लाने से परहेज कर दिया है।
गांव के हर घर में टैंक बना हुआ है। इसे लोग 350 रुपये के टैंकर से भरवाते हैं। जिनके पास रुपये नहीं है उन्हें सिर पर या साइकिल पर दूसरे जगहों से पानी लाना पड़ता है। गांव की जमीन का अधिग्रहण कर गौंच्छी ड्रेन बनाई गई।