सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में सात साल की पाकिस्तानी बच्ची अनाबिया (जन्नत का फूल) का लिवर ट्रांसप्लांट किया गया है। परिजनों का कहना है कि जब ऑपरेशन के लिए उन्होंने भारत आने का इरादा किया तो वहां के लोगों ने काफी डराया, लेकिन यहां आकर जो प्यार और मदद मिली, उससे अब वापस जाने की इच्छा नहीं है।
बुधवार को अस्पताल में हुई प्रेस वार्ता में परिजनों ने यह बात कहीं। बच्ची के अब्बू मंसूर हुसैन पाकिस्तान के हैदराबाद में एक जनरल स्टोर चलाते हैं। अम्मी शाइस्ता मंसूर गृहिणी हैं। शाइस्ता ने बताया कि पाकिस्तान में लिवर ट्रांसप्लांट होते हैं, लेकिन सफल होने की गुंजाइश कम ही रहती है।
दो साल पहले अस्पताल के लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के प्रमुख डॉ. विवेक विज और टीम ने पाकिस्तान में आउट स्टेशन ओपीडी लगाई थी। अनाबिया जन्म से ही पेट दर्द से पीड़ित थी। जांच के बाद डॉक्टर ने लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी। इलाज में 16 लाख का खर्चा था, जिसमें छह लाख की रियायत इस अस्पताल से मिली।
इसके अलावा दस लाख में काफी मदद हैदराबाद की फहाद फाउंडेशन ने दी। उन्होंने बताया कि भारत आने के वक्त वहां लोगों ने यहां पाकिस्तानियों के लिए अच्छा माहौल न बताते हुए डराया, लेकिन यहां जो प्यार और मदद मिली, उससे बिल्कुल नहीं लगा कि दूसरे देश में हैं।