छह साल के संघर्ष के बाद संकेत राठौर को मिला बड़ा मुकाम
प्रथम चौहान
पूर्वी दिल्ली। कभी क्रिकेट मैदान पर गेंद बेचकर अपनी एकेडमी की फीस जुटाने वाले 22 वर्षीय संकेत राठौर का चयन रणजी ट्रॉफी के लिए हुआ है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने क्रिकेटर बनने का सपना नहीं छोड़ा। छह साल तक नियमित प्रशिक्षण, लगातार अभ्यास और मेहनत के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। उनकी उपलब्धि परिवार के साथ उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो मुश्किल हालात में अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
संकेत के पिता स्टील के कारखाने में काम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि क्रिकेट प्रशिक्षण और एकेडमी की फीस आसानी से जुटाई जा सके। ऐसे में संकेत ने हार मानने के बजाय मैदान पर गेंद बेचकर फीस का इंतजाम किया। उन्होंने आर्थिक परेशानियों को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया और खेल को बेहतर बनाने के लिए लगातार मेहनत करते रहे।
संकेत ने क्रिकेट का सफर पूर्वी दिल्ली की नानकसर क्रिकेट एकेडमी से शुरू किया था। नियमित अभ्यास से उन्होंने अपनी गेंदबाजी में सुधार किया। अब वह इसी एकेडमी में गेंदबाजी कोच के रूप में काम कर रहे हैं और युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
बड़े टूर्नामेंट में भी दिखाया दम
रणजी ट्रॉफी के ट्रायल में बेहतर प्रदर्शन के बाद संकेत को चयन का अवसर मिला। इससे पहले वह सौराष्ट्र टी-10 प्रीमियर लीग, टी-10 चैंपियनशिप और गाजियाबाद प्रीमियर लीग जैसे टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुके हैं। इन प्रतियोगिताओं में उन्हें मैन ऑफ द मैच का खिताब भी मिला।
परिवार में खुशी का माहौल
रणजी ट्रॉफी में चयन की खबर से संकेत के परिवार में खुशी है। उनके कोच के अनुसार, संकेत का सफर बताता है कि कामयाबी के लिए सुविधाओं के साथ लगन, मेहनत और लगातार प्रयास भी जरूरी हैं।