नई वार्डबंदी का मामला लटकता जा रहा है। अब मामले की सुनवाई के लिए 11 मार्च तय की गई है। इसमें कोर्ट दोनों पक्षों को सुनेगा। यह भी माना जा रहा है कि वार्डबंदी की सुनवाई हाईकोर्ट की दूसरी बेंच भी कर सकती है।
याचिकाकर्ता के वकील शिव कुमार का कहना है कि हाईकोर्ट ने निगम को नया नोटिफिकेशन कराने के लिए नहीं कहा था। निगम ने जो नोटिफिकेशन करा नई एडहॉक कमेटी गठित की है वह भी कानूनसम्मत नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने 19 जनवरी निर्धारित कर सरकार से जवाब मांगा था। लेकिन सरकार अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 23 फरवरी की तारीख निर्धारित की थी। निगम ने सरकार की ओर से अपना जवाब दाखिल कर दिया है।
ज्ञात हो कि निगम चुनाव कराने के लिए 9 फरवरी 2015 में वार्डबंदी कमेटी का गठन किया गया था। इसमें निवर्तमान मेयर अशोक अरोड़ा, सीनियर डिप्टी मेयर मुकेश शर्मा, डिप्टी मेयर राजेंद्र भामला व तीन पार्षद योगेश धींगड़ा, अनिल शर्मा और राव राम कुमार को सदस्य बनाया गया था। इस कमेटी ने 35 वार्डों की वार्डबंदी का काम पूरा कर दिया।
लेकिन सरकार ने जून महीने में नगर निगम सदन भंग होने के बाद बगैर कमेटी भंग किए नई एडहॉक कमेटी गठित कर दी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। 21 सितंबर को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा था। कोर्ट में कई सुनवाई होने के बाद निगम ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अब वार्डबंदी का मामला 11 मार्च को सुना जाएगा। इस दिन कोर्ट दोनों पक्षों की सुनवाई करेगी। यह भी माना जा रहा है कि मामले की सुनवाई कर रही बेंच भी बदल सकती है। माना जा रहा है कि यदि बेंच बदल गई तो निगम की परेशानी बढ़ सकती है।