अंगदान करने के लिए लाई जा रही जागरूकता का असर दिखने लगा है। कोटा में मेडिकल की तैयारी कर रही एक छात्रा (17) को लिवर में कुछ दिक्कतों के बाद दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बैलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।
छात्रा की ब्रेन डेड जैसी स्थिति हो रही थी। उसके परिजन अंगदान करना चाहते थे, लेकिन कुछ दिक्कतों की वजह से ब्रेन डेड की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी।
तब परिजनों ने कहा कि कार्डियक अरेस्ट डेथ घोषित करके भी यदि अंगदान हो सकता है तो इस विकल्प पर काम किया जाए। इसके बाद चिकित्सकों ने 12 घंटे से अधिक समय तक इंतजार के बाद कार्डियक अरेस्ट डेथ की प्रक्रिया पूरी की।
17 अगस्त को अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बैलियरी साइंसेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विकास जैन ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट डेथ घोषित होने के कुछ मिनटों के अंदर ही अंगों को निकाला गया।