पूर्वोत्तर भारत में भारतीय सेना के कई बड़े सैन्य ऑपरेशनों में अहम भूमिका निभाने वाले एक मेजर जनरल को बर्खास्त करने का आदेश दिया गया है। साथी महिला कैप्टन के यौन शोषण के दो साल पुराने मामले में जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) ने रविवार को यह आदेश दिया।
सूत्रों के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता वाले जीसीएम ने रविवार को दोपहर 3.30 बजे अपना निर्णय सुनाया, जिसमें आरोपी मेजर जनरल को आईपीसी की धारा 354ए और आर्मी एक्ट 45 (सेना में अधिकारी के आचरण से संबंधित) के तहत दोषी माना गया।
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिमी कमांड के दायरे में आने वाली जीसीएम के निर्णय को अब चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ को भेजा जाएगा, जहां से इस निर्णय को मंजूरी मिलते ही मेजर जनरल की बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हालांकि चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ को जीसीएम का निर्णय बदलने का भी अधिकार होता है।
हालांकि इस वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने अपने खिलाफ लगाए आरोपों को गलत बताया और कहा कि उन्हें सेना की आंतरिक राजनीति का शिकार बनाया जा रहा है। मेजर जनरल की तरफ से कोर्ट मार्शल में पेश हुए एडवोकेट आनंद कुमार ने इस निर्णय के खिलाफ अपील करने की बात कही है।
2016 का है मामला
मेजर जनरल के खिलाफ कैप्टन रैंक की महिला अधिकारी के यौन उत्पीड़न का आरोप 2016 का है, जब वह पूर्वोत्तर भारत में नियुक्ति पर थे। नगालैंड में पूर्वी कमांड के तहत असम राइफल्स में चंडीमंदिर पर नियुक्ति के दौरान कैप्टन रैंक की अधिकारी ने उनके खिलाफ सेना की जज एडवोकेट जनरल शाखा को लिखित शिकायत भेजी थी। इस साल जून मेें मेजर जनरल के खिलाफ अदालती प्रक्रिया शुरू की गई थी और उन्हें अंबाला में अटैच कर दिया गया था।
2007 में भी हुआ था ऐसा मामला
सेना में किसी मेजर जनरल रैंक के अधिकारी की यौन उत्पीड़न में यह दूसरी बर्खास्तगी है। इससे पहले 2007 में भी एक महिला अधिकारी के आरोप पर एक मेजर जनरल को सेना छोड़नी पड़ी थी। उस अधिकारी पर आरोप था कि महिला अधिकारी को योग सिखाने के नाम पर उसने कई बार जानबूझकर गलत जगह छुआ था।