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केजरीवाल के शपथग्रहण में टीचरों को बुलाने का आदेश,अटेंडेंस चेक करने के लिए अधिकारी नियुक्त

Fri, 14 Feb 2020 10:51 PM IST
Abhishek Singh अमित शर्मा, नई दिल्ली

सार

  • सरकार के सभी स्कूलों के अध्यापकों को होना पड़ेगा शामिल
  • भाजपा ने इसको लेकर विरोध जताया है 
  • शिक्षा निदेशालय  ने जारी किया है सर्कुलर
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जनादेश हासिल करने वाले अरविंद केजरीवाल रविवार को रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण करेंगे। आम आदमी पार्टी (आप) इस कार्यक्रम को सफल कराने के लिए भारी भीड़ जुटाने की कोशिश कर रही है।

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इस कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के सभी स्कूलों के अध्यापकों को भी शामिल करने के लिए शुक्रवार को एक आदेश जारी किया गया है जिस पर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल सरकार अपने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सरकारी डंडे का इस्तेमाल कर रही है जो बेहद आपत्तिजनक है। सरकार को ऐसी कोशिश से बचना चाहिए। 

शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि अधिकारियों को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इनमें DIET, SCERT और परमानेंट टीचर्स, गेस्ट टीचर्स, को-आर्डिनेटर, हैपीनेस करिकुलम के को-आर्डिनेटर और सभी प्रिंसिपल-वाईस प्रेंसिपल इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। 
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क्षेत्रवार इन अध्यापकों, गेस्ट टीचरों, DIET, SCERT के अधिकारियों और प्रिंसिपलों की उपस्थिति चेक करने के लिए बाकायदा विशेष अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। सर्कुलर के मुताबिक़ शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों को अपनी उपस्थिति की जानकारी केएस उपाध्याय को देनी होगी। इसी प्रकार दक्षिणी, दक्षिणी-पूर्वी, केन्द्रीय और नई दिल्ली एरिया के अधिकारीयों को अपनी उपस्थिति की जानकारी साउथ-ईस्ट के अधिकारी डॉक्टर संजय चतुर्वेदी को देनी होगी। 

भाजपा ने किया विरोध

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल लुभावी योजनाओं का सपना दिखाकर चुनाव अवश्य जीत गए हैं, लेकिन उनके साथ आज भी जनता नहीं है। यही कारण है कि अपना एक निजी कार्यक्रम संपन्न कराने के लिए उन्होंने सरकारी अध्यापकों को आदेश जारी किया है।

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार अपनी नकली लोकप्रियता को साबित करने के लिए सरकारी डंडे का इस्तेमाल कर रही है। प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि इससे अध्यापकों और छात्रों का मनोबल गिरता है और इसका नकारात्मक सन्देश जाता है। सरकार को इससे बचने की कोशिश करनी चाहिए।  

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