अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले में सुकेश चंद्रशेखर को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पाया कि वह इस मामले में पहले ही 8 वर्ष, 9 महीने और 14 दिन न्यायिक हिरासत में बिता चुके हैं, जबकि इस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा सात वर्ष है। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विद्या प्रकाश ने अपने आदेश में निर्देश दिया कि चंद्रशेखर को इस मामले में तत्काल रिहा किया जाए, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हों। हालांकि, इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें जेल से पूरी तरह रिहा कर दिया जाएगा, क्योंकि वह कई अन्य आपराधिक मामलों में भी मुकदमों का सामना कर रहे हैं। उन मामलों में आवश्यक होने पर उनकी हिरासत जारी रहेगी। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई की तारीख तक एक लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका (बॉन्ड) जमा करने का भी निर्देश दिया। चंद्रशेखर की ओर से पेश अधिवक्ता अनंत मलिक ने दलील दी कि वह इस मामले में निर्धारित अधिकतम सजा की अवधि से अधिक समय से हिरासत में हैं। अदालत ने अपने आदेश में यह भी गौर किया कि अभियोजन पक्ष ने न तो यह आरोप लगाया और न ही कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत किया, जिससे यह साबित हो कि चंद्रशेखर ने किसी भी स्तर पर न्यायिक कार्यवाही में देरी की थी।
जेल अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत नॉमिनल रोल के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 तक चंद्रशेखर इस मामले में 8 वर्ष, 9 महीने और 14 दिन हिरासत में बिता चुके थे। यह निर्धारित अधिकतम सात वर्ष की सजा से 1 वर्ष, 9 महीने और 14 दिन अधिक है।