विपक्ष ने दिल्ली सरकार पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में धांधली करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने संवेदनशील व्यापार व कर विभाग के अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में बड़े स्तर पर हेराफेरी की है। इस मुद्दे पर भाजपा विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल से भी मिला। उनसे 14 फरवरी 2015 से 4 अगस्त 2016 (18 महीने) के बीच हुए सभी ट्रांसफर और पोस्टिंग की उच्चतरीय जांच करवाने की मांग की।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि उपराज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि सरकार ने चुनिंदा 18 वरिष्ठ भ्रष्ट अधिकारियों को व्यापार एवं कर विभाग में स्थानांतरित किया था। इनमें से 9 अधिकारियों को उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व 9 अधिकारियों को मुख्यमंत्री के आदेश पर तत्कालीन सर्विसेज विभाग के सचिव राजेंद्र कुमार ने तैनात किया।
सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका सौंपी थी, जिस पर 4 अगस्त 2016 को आदेश पास करते हुए न्यायालय ने कहा था कि सर्विसेज के मामले में उपराज्यपाल सक्षम अधिकारी हैं। उन्हें ट्रांसफर और पोस्टिंग का पूरा अधिकार है। लिहाजा इसकी जांच होनी चाहिए। ताकि पता चल सके कि किन-किन अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के आदेश सरकार ने जारी किया। इससे सरकार की धांधलियों का ब्यौरा भी खुलकर सामने आएगा। भाजपा प्रतिनधिमंडल में विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा, ओपी शर्मा, जगदीश प्रधान शामिल थे।
विधानसभा में सिसोदिया ने माना, चपरासी के योग्य नहीं अधिकारी : विजेंद्र
नेता विपक्ष ने कहा कि उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विधानसभा में स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि जिन अधिकारियों को व्यापार एवं कर विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में पोस्ट किया गया, वे चपरासी की नौकरी के योग्य भी नहीं थे। इन अधिकारियों को 26 अक्तूबर 2018 को सर्विसेस डिपार्टमेंट को सरेंडर करा दिया गया था। सिसोदिया नेे विधानसभा में ही उपराज्यपाल व उनके अधीनस्थ अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। राजेंद्र कुमार तत्कालीन सर्विसेज डिपार्टमेंट के सचिव थे। उनके खिलाफ सीबीआई की जांच चल रही है।