चुनाव प्रचार के दौरान कम खर्च और मतदाताओं से सीधे जुड़ने में आसानी के चलते खुली जीप उम्मीदवारों की पहली पसंद बन गई है। इन दिनों प्रत्याशियों व कार्यकर्ताओं में खुली जीप की मांग बढ़ गई है।
नेताओं की मानें तो खुली जीप में प्रचार करने में आसानी होती है। जब नेता का काफिला निकलता है तो लोग घरों की छतों या बालकनी में आ जाते हैं। इससे खुली जीप में सवार नेताजी मतदाता से रूबरू हो जाते हैं।
डिजायनर्स खुली जीपों की डिमांड
गेट पर गाड़ियों को किराए पर चलाने वाले व्यापारी मुकुल बताते हैं कि चुनावी मौसम में डिमांड पर भी खुली जीप तैयार की जा रही हैं। पार्टियां अपने हिसाब से गाड़ी का रंग बताती हैं।
एक दिन के लिए साधारण खुली जीप का करीब 10 हजार रुपये में किराये पर मिल रही है। मायापुरी व करोलबाग में खुली जीप की सबसे बड़ी मार्केट है। जिसके पास खुद की जीप है, उसके लिए बाजार में मॉडिफाई करने की भी सुविधा है। इसमें कम से कम 2-3 लाख रुपये की लागत आती है।
कभी भी कहीं भी पहुंच
अरविंद केजरीवाल की जीप का स्टेयरिंग संभाल रहे रोहित ने बताया कि खर्चा व काफिला सीमित करने के बाद सभी प्रत्याशी कम से कम वाहनों का इस्तेमाल करते हैं, मगर कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की भी मजबूरी होती है।
खुली जीप पर 15-20 लोग भी सवार हो जाए तो दिक्कत नहीं होती है। सड़क टूटी हो या पानी भरा हो, यह लग्जरी गाड़ियों की तरह रुकेगी नहीं। खुली जीप का लोगों में इतना चाव होता है कि यह जहां से गुजरती है, लोग उसे देखने के लिए बाहर आते हैं।
सिब्बल, गांधी व केजरी, सब जीप पर सवार
इस समय सभी नेता जीप पर सवार होकर जनता के बीच में हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जिनके पास खुद की जीप है। वह चुनाव में ही इसका इस्तेमाल करते हैैं।
कपिल सिब्बल उन्हीं में से एक हैं। वह चुनाव में कैंपेनिंग के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, अरविंद केजरीवाल, डॉ. हर्षवर्धन, मीनाक्षी लेखी व राजमोहन गांधी भी इसमें सवार होकर अपने इलाके में वोट मांग रहे हैं।
ओपन जीप के हैं फायदे ज्यादा
एक दौर था जब उम्मीदवार वोट मांगने के जाते थे तो गाड़ियों का काफिला उनके साथ होता था। मगर अब चुनाव आयोग ने एक साथ 10 से अधिक वाहनों पर रोक लगा दी है। यही नहीं वाहन की न्यूनतम दर भी आयोग तय करता है।
लग्जरी गाड़ी का एसी के साथ प्रयोग करने पर उसके प्रतिदिन के हिसाब से करीब 16 सौ से ज्यादा रुपये लगते हैं, लेकिन खुली जीप में एसी नहीं होता है। उसका चुनाव आयोग एक हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जोड़ता है।