-बृहस्पतिवार को दिल्ली में लगातार चौथे दिन शीतलहर, बीते दो साल की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई
-पालम में बीते 15 साल का रिकॉर्ड टूटा, 16 जनवरी 2010 में न्यूनतम पारा 4.7 डिग्री दर्ज किया गया था
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
राजधानी में शीतलहर जारी है। बीते एक हफ्ते से लगातार न्यूनतम तापमान में गिरावट है। ऐसे में बृहस्पतिवार को दिल्ली में लगातार चौथे दिन शीतलहर का कहर रहा। यही नहीं, यह बीते दो साल की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। न्यूनतम पारा 2.9 डिग्री रहा। सुबह की शुरुआत कोहरे व धुंध के बीच हुई। इससे दृश्यता भी कम रही। सुबह बर्फीली हवाओं और 3 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे लुढ़के पारे ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी।
दोपहर आते-आते सूर्यदेव ने दर्शन दिए, इससे लोगों को कुछ राहत मिली। लेकिन, शाम को फिर तेज ठंडी हवाओं ने गलन बढ़ा दी। इस दौरान अधिकतम तापमान सामान्य से 0.1 डिग्री कम के साथ 20 रहा। इसके अलावा, न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री दर्ज हुआ। यह सामान्य से 4.5 डिग्री कम रहा। दिल्ली में अधिकतम आर्द्रता 100 प्रतिशत और न्यूनतम आर्द्रता 51 प्रतिशत रही।
हालांकि, दिल्ली में 0 डिग्री से नीचे भी तापमान दर्ज हुआ है। 16 जनवरी 1935 को पारा -0.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ था। बृहस्पतिवार सुबह का न्यूनतम तापमान इस सीजन का सबसे कम दर्ज किया गया, जिसने शिमला जैसे हिल स्टेशन को भी पीछे छोड़ दिया। लोग घरों से निकलने में हिचकिचाते दिखे। वहीं, पालम में बीते 15 साल का रिकॉर्ड टूट गया, जहां 16 जनवरी 2010 में न्यूनतम पारा 4.7 डिग्री दर्ज किया गया था।
मौसम विभाग के अनुसार, रिज में 4.5 और आया नगर में 2.7, लोधी रोड में 3.4 व पालम में 2.3 न्यूनतम पारा दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान दिल्ली के विभिन्न इलाकों में शीतलहर और कोहरे की स्थिति महसूस की गई। वहीं, पालम में सुबह 6 बजे हल्के कोहरे के कारण दृष्टि क्षमता केवल 50 मीटर रही। वहीं, सफदरजंग में सुबह 6.30 बजे हल्के कोहरे के कारण दृश्यता लगभग 100 मीटर तक सीमित रही। मौसम विभाग ने लोगों को सुबह-सुबह और देर रात के समय ठंड और कोहरे के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। वाहन चालकों को भी कोहरे के कारण सड़क पर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहा नया पश्चिमी विक्षोभ, 19 जनवरी से असर की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है। यह पश्चिमी विक्षोभ मध्य और ऊपरी वायुमंडल में पछुआ हवाओं के बीच एक ट्रफ के रूप में देखा जा रहा है। इसका अक्ष समुद्र तल से लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह 45 डिग्री पूर्व देशांतर के साथ-साथ 23 डिग्री उत्तरी अक्षांश के उत्तर में आगे बढ़ रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सिस्टम के चलते आने वाले दिनों में पहाड़ी इलाकों के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना बन रही है। इसके अलावा, एक और नया पश्चिमी विक्षोभ 19 जनवरी 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसके असर से मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि पहाड़ों पर बर्फबारी बढ़ सकती है। तापमान में गिरावट आने और ठंड बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली में कब कितना गिरा पारा
16 जनवरी 1935: -0.6 डिग्री
26 जनवरी 1964: 1.0 डिग्री
8 जनवरी 2006: 0.2 डिग्री
1 जनवरी 2021: 1.1 डिग्री
16 जनवरी 2023: 1.4 डिग्री
12 जनवरी 1967: 1.5 डिग्री
1 जनवरी 1955: 1.6 डिग्री
8 जनवरी 2023: 1.9 डिग्री
14 जनवरी 2021: 2.0 डिग्री
26 जनवरी 2021: 2.1 डिग्री