कोरोना वायरस: जांच के लिए सैंपल देते लोग
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दिल्ली में भले ही संक्रमण दर अब पांच फीसदी से कम हो, लेकिन इसकी जांच को लेकर अगर तकनीकों के बीच अंतर देखा जाए तो एंटीजन जांच फिसड्डी साबित होगी। आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली में कोरोना की सस्ती जांच को अपनाने से केवल एक फीसदी संक्रमित मरीजों की पहचान हो पा रही है।
वहीं, आरटी पीसीआर जांच बढ़ाने से इससे कई गुना अधिक संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर बीते एक दिसंबर को दिल्ली में 78, 949 नमूनों की जांच हुई थी। इनमें से 36,370 सैंपल की आरटी पीसीआर जांच हुई थी और बाकी एंटीजन किट्स के जरिये जांचा गया था।
आरटी पीसीआर जांच 8.99 फीसदी संक्रमित मिले, जबकि एंटीजन में केवल 1.58 फीसदी। 19 अक्तूबर से एक दिसंबर के बीच जांच की स्थिति देखें तो
दिल्ली में आरटी पीसीआर के जरिये एक दिन में 30 फीसदी नमूनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई जबकि एंटीजन जांच की 8.39 फीसदी।
जानकारी के अनुसार एक एटीजन किट करीब 400 से 500 रुपये में पड़ती है। जबकि एक आरटी पीसीआर जांच पर करीब दो से तीन हजार रुपये तक का खर्च आता है।