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आठ महीने में केवल 22 दिन ही मिला रोजगार, 1207 पंजीकृत मजदूरों में से 629 को नहीं मिला काम

Sun, 24 Nov 2019 09:37 AM IST
शाहरुख खान गौरव शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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सांकेतिक तस्वीर
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में ही रोजगार की गारंटी शामिल है। लेकिन आंकड़ों के मुताबिक गौतमबुद्ध नगर में पंजीकृत मजदूरों को भी पूरा काम नहीं मिल रहा है। 
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जिला नगरीय विकास अभिकरण (डीआरडीए) कार्यालय की समीक्षा में योजना के क्रियान्वयन की पोल खुलकर सामने आ गई है। इस वित्तिय वर्ष में अप्रैल 2019 से 22 नवंबर 2019 तक (कुल 236 दिनों) में 578 मजदूरों औसतन 22 दिन ही रोजगार दिया जा सका है।

केंद्र सरकार की योजना मनरेगा में पंजीकृत मजदूर को 100 दिन काम देना होता है। मजदूर को एक दिन काम के बदले 182 रुपये देने होते हैं। ग्राम पंचायत, ब्लॉक या फिर जिला स्तर पर पंजीकृत मजदूरों को काम दिलाने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। 
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जिले में पंजीकृत सक्रिय जॉब धारकों (मजदूरों) की संख्या 1207 है। विभागीय अफसरों के स्तर से अप्रैल से 22 नवंबर 2019 तक का रिकॉर्ड खंगाला तो असलियत खुलकर सामने आ गई। अभी तक 578 मजदूरों को कुल 13136 दिन काम मिला है। यानी इन 578 मजदूरों को औसतन पिछले 8 महीने (236 दिन) में 22 दिन ही काम मिल पाया। शेष पंजीकृत 629 मजदूरों को कोई काम नहीं मिला। रिकार्ड के मुताबिक पिछले वर्ष भी योजना का हाल बेहाल था। 
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400 रुपये लेते हैं मजदूर

मनरेगा के तहत रोजगार दिलाने को सरकार भले ही प्रतिबद्ध हो। लेकिन नुमाइंदों की दलील अलग है। विभाग के ही एक कर्मी ने बताया कि बाहर किसी भी मजदूर को 350 रुपये से 400 रुपये तक मजदूरी मिलती है। सरकार केवल 182 रुपये प्रतिदिन के दे रही है। इसलिए ही मजदूर योजना के प्रति आकर्षित नहीं होते। न ही पंजीकृत कराते है।

योजना के प्रचार पर नहीं है ध्यान
विभाग के कर्मी ने बताया कि कुछ साल पहले तक गांवों की संख्या 200 पार थी। प्राधिकरण क्षेत्रों का दायरा बढ़ा तो गांवों की संख्या सिमटकर 88 रह गई है। गांव कम होने के साथ ही मजदूरों की संख्या भी कम हो गई। वहीं सूत्रों ने बताया कि योजना को लेकर अधिकारी-कर्मचारी ही गंभीर नहीं है। दादरी, जेवर, दनकौर, बिलासपुर, रबुपूरा आदि क्षेत्रों के 88 गांवों में योजना को लेकर न तो खास प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। न कैंप का आयोजन अफसर कराते हैं। जिला स्तर पर आंकड़ों में बाजीगरी कर योजना का क्रियान्वयन चल रहा है।

गांव कम होने से मजदूरी पर प्रभाव पड़ा है। मजदूर पैसे कम भी बताते हैं। इसको लेकर शासन स्तर पर वार्ता की गई है। योजना के क्रियान्वयन में पूरी गंभीरता बरती जा रही है। - नीरज कुमार श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक, जिला नगरीय विकास अभिकरण


 
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