राजधानी में लावारिस कुत्तों के आतंक से निपटने के लिए निगम इस साल एक लाख कुत्तों की नसबंदी कराएगा। लावारिस कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए पशु चिकित्सा सेवा विभाग गैर सरकारी संस्थाओं और निजी पशु चिकित्सकों की सहायता से नसबंदी का कार्यक्रम चला रहा है।
क्षेत्र आधारित बंध्याकरण नीति के तहत डॉग एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। इससे सड़कों पर ज्यादा से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी की जाएगी। निगम ने बीते साल करीब 50 हजार लावारिस कुत्तों की नसबंदी की थी। इस साल इसे दोगुना करने करने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में कुल 17 केंद्रों पर लावारिस कुत्तों की नसबंदी का कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
जल्द ही चार नए नसबंदी केंद्र भी शुरू किए जाने हैं। इस कार्य में लगे एनजीओ और निजी पशु अस्पतालों की ओर से चलाए जा रहे नसबंदी केंद्रों को निगम की ओर से डॉग एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई है, जरूरत पड़ने पर इसकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी। इससे नसबंदी के लक्ष्य को तेजी से पूरा करने में आसानी होगी।
डॉग एंबुलेंस का होगा इस्तेमाल
डॉग एंबुलेंस से कुत्तों की नसबंदी के अलावा रेबीज के खिलाफ टीकाकरण भी किया जा रहा है। निगम के सभी 12 जोन में इसके लिए शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। निगम के अधिकारियों के मुताबिक 28 सितंबर को 16वें विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर एक साथ छह जोन में एंटी रेबीज वैक्सीनेशन कैंप लगाकर 1332 लावारिस कुत्तों को वैक्सीन लगाई गई। इस साल डॉग एंबुलेंस की संख्या बढ़ाकर नसबंदी व वैक्सीनेशन की प्रक्रिया तेज की जाएगी।