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Delhi NCR News: हर तीसरे बच्चे में पोषक तत्वों की कमी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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नई दिल्ली। बच्चों में जंक फूड का बढ़ता चलन अब एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता बनता जा रहा है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 30% बच्चे ऐसे हैं जो देखने में स्वस्थ और सामान्य लगते हैं, लेकिन उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है। यह स्थिति छिपा कुपोषण के रूप में सामने आ रही है। पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और पैकेज्ड स्नैक्स जैसे खाद्य पदार्थ बच्चों का पेट तो भर देते हैं, लेकिन इनमें विटामिन, मिनरल और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा नहीं होती। इसके कारण बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर हो रही है और वे जल्दी थकान, ध्यान की कमी और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंक फूड से मिलने वाली अतिरिक्त कैलोरी बच्चों में मोटापा बढ़ा रही है, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा।

डॉक्टर का वर्जन

स्वामी दयानंद अस्पताल के पेडियाट्रिक विभाग के डॉ. आदर्श आजाद के अनुसार, करीब 30 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनमें हिडन हंगर की समस्या देखने को मिल रही है। जंक फूड में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है, जिससे बच्चों का समुचित विकास प्रभावित होता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के आहार में संतुलित और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें और जंक फूड की आदत को सीमित करें।
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जंक फूड छिपे कुपोषण की जड़


छिपा कुपोषण वह स्थिति है, जिसमें बच्चे को पर्याप्त कैलोरी तो मिलती है, लेकिन शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। ऐसे बच्चे बाहर से सामान्य या मोटे दिख सकते हैं, लेकिन अंदर से कमजोर होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार और जंक फूड से दूरी बनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है।



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