बसों का परीक्षण कराने के लिए परिवहन विभाग के चार प्रवर्तन अधिकारी और यूपी रोडवेज से बुलाए गए दो फोरमैन की टीमें लगी, जिन्होंने स्कूल बसों का एक-एक कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मापदंड के आधार पर भौतिक परीक्षण किया।
पहले 1400 स्कूल बसों में से 712 बसों का भौतिक सत्यापन किया गया। इनमें से 125 स्कूल बसों में खामियां मिलीं। किसी बस का फुट रेस्ट ठीक नहीं था। किसी का इमरजेंसी गेट ही नहीं खुल पाया।
कई बसों पर यह नहीं लिखा था कि वह स्कूल बस हैं। ऐसी सभी बसों के स्वामियों को परिवहन विभाग ने नोटिस जारी करके एक सप्ताह में खामियां दूर कराकर फिर से परीक्षण कराने को कहा है। समय से परीक्षण न कराने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एआरटी विश्वजीत सिंह ने बताया कि अभी आधी बसों का भी भौतिक सत्यापन नहीं हो पाया है। बाकी बसों का भौतिक सत्यापन कराने के लिए 15 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके बाद परिवहन विभाग सघन अभियान चलाकर अनफिट स्कूल बसों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेगा।
इन स्कूलों की बसों का हुआ सत्यापन
पहले दिन मुख्य रूप से डीपीसी (जी), डीपीएस, राजनगर, देहरादून पब्लिक स्कूल, रियान इंटरनेशनल स्कूल, केडीबी पब्लिक स्कूल, भागीरथ पब्लिक स्कूल, एमिटी पब्लिक स्कूल, होली एंजिल पब्लिक स्कूल और सीएसएचपी स्कूल आदि की बसों का भौतिक सत्यापन किया गया।
चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस भी चेक किए
परिवहन अधिकारियों ने स्कूली बसों के चालकों की ड्रेस और ड्राइविंग लाइसेंस भी चेक करके उन्हें यातायात के नियमों का पालन करने के निर्देश दिए। चालकों को यह भी बताया गया कि आपके नियम तोड़ने से किसी की जान भी जा सकती है। इसलिए सावधानी से वाहन चलाएं। जल्दबाजी किसी भी हाल में न करें।
बस पर स्कूल बस या ऑन ड्यूटी स्कूल लिखा होना चाहिए
बस की बॉडी पर स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा हो
खिड़की पर क्षैतिज ग्रिल/जाली लगी हो
बच्चों के चढ़ने-उतरने के लिए दरवाजे पर फुट बोर्ड लगा हो
सीट के पीछे नीचे बस्ता रखने की जगह होनी चाहिए
अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स हो
स्पीड गवर्नर और प्रेशर हार्न लगा हो
इस टीम ने किया फिटनेस टेस्ट
एआरटीओ प्रवर्तन राकेंद्र सिंह, प्रवीण शंकर राय, अश्वनी कुमार सिंह राजपूत, संतदेव सिंह, एआरटीओ प्रशासन ने स्कूली बसों की फिटनेस टेस्ट की।