अपनी बहादुरी और काम के जज्बे को लेकर महकमे में चर्चित लिडिंग फायरमैन महावीर बृहस्पतिवार को पीरागढ़ी स्थित बैटरी की फैक्टरी में लगी आग में एक बार फिर जान पर खेल गया। उसने एक बार फिर मौत को मात दे दी। फिलहाल उसका बालाजी एक्शन अस्पताल में इलाज चल रहा है।
मलबे के नीचे दबने की वजह से उसकी कमर और पैर के हड्डी टूट गई है। बावजूद इसके, अस्पताल पहुंचे अधिकारियों से उसने रेस्क्यू अभियान के बारे में पूछा और अपने सहयोगियों का हाल-चाल जाना। इससे पहले भी वह बहादुरी दिखाकर आग से कई लोगों को बचा चुका है और इसके लिए उसे शौर्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
फायर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने अपने एक जाबांज ऑफिसर अमित को खो दिया है, लेकिन फायरकर्मी मंजीत और महावीर ने मौत को मात दे दी है। महावीर आग लगने पर टीम को लीड करता है और वह अपनी जान की परवाह नहीं करता।
वर्ष 2010 में मालीबाड़ा इलाके में एक इमारत में आग लगी थी, जिसमें उसने अपने एक सहयोगी फायरमैन के साथ मिलकर फंसे लोगों को बाहर निकाला था। इस घटना में सहयोगी फायरमैन की मौत हो गई थी। उसकी इस बहादुरी के लिए उसे शौर्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
बृहस्पतिवार को भी बैटरी की फैक्टरी में लगी आग पर काबू पाने के लिए उसने टीम का नेतृत्व किया। हालांकि, धमाका होने के बाद इमारत का हिस्सा गिरने से वह अपने दो सहयोगी के साथ मलबे में दब गया।
उसकी कमर से नीचे के हिस्से पर दीवार का एक हिस्सा गिरा हुआ था, लेकिन फंसे होने के बावजूद अपने से आगे मलबे में फंसे मंजीत और अमित को पहले निकालने की बात कह रहा था। अधिकारियों ने बताया कि मंजीत के शरीर पर एक एंगल गिरा था, जिससे वहां सांस लेने के लिए जगह बन गई थी। अमित लगातार रेस्क्यू टीम से फोन पर जुड़ा हुआ था।