दिल्ली में दस साल पुराने डीजल वाहनों को एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) तभी जारी किया जाएगा, जब खरीदने वाला उसका पंजीकरण एनसीआर से बाहर कराएगा। दिल्ली परिवहन विभाग ने इसे लेकर सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (एमएलओ) को निर्देश जारी किया है।
खरीदार रजिस्ट्रेशन कहां कराएगा, उस राज्य व जगह की जानकारी के साथ स्थानीय पते का प्रमाणपत्र भी देना होगा। परिवहन विभाग की ओर से जारी आदेश को चार प्वाइंट में दिया गया है। पहला दस साल पुराने डीजल वाहनों को एनओसी देने में सभी प्रक्रिया का ध्यान रखा जाए।
यह खास ध्यान दें कि खरीदार एनसीआर से बाहर का हो। दूसरे प्वाइंट में कहा गया है कि एनसीआर से बाहर ले जाने पर ही वाहन को एनओसी जारी की जाए। तीसरा कि एनओसी लेने के बाद खरीदार को यह अधिकार नहीं मिलेगा की वह उस वाहन को एनसीआर में चलाए।
आखिरी प्वाइंट में कहा है कि एक बार एनओसी देने के बाद दिल्ली से उसके सभी तरह के ट्रांजैक्शन को ब्लॉक कर दिया जाए। परिवहन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक यह लगातार सवाल पूछा जा रहा था कि क्या दिल्ली से बाहर कहीं भी वाहन का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।
एनओसी तभी जारी हो जबकि खरीदार एनसीआर से बाहर का हो
- फोटो : अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
इस दुविधा को खत्म करने के लिए यह आदेश जारी किया गया है। एनओसी तभी जारी हो जबकि खरीदार एनसीआर से बाहर का हो। एनसीआर में दिल्ली के अलावा तीन राज्य हरियाणा, राजस्थान और यूपी के 22 जिले हैं। इसमें हरियाणा के 13, यूपी के 7 और राजस्थान के दो जिले शामिल हैं।
बताते चलें कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दस साल पुराने डीजल वाहनों पर पाबंदी लगा दी है। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दस साल पुराने डीजल वाहनों को दिल्ली से बाहर रजिस्ट्रेशन कराके चलाने की मंजूरी दी।
कोर्ट के आदेश पर बीते 25 जनवरी से ही दस साल पुराने डीजल वाहनों को एनओसी देने का काम शुरू कर दिया गया है। लेकिन इसे लेकर दुविधा यह थी कि इसे दिल्ली से बाहर एनसीआर के शहरों में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है या नहीं।
इन शहरों में नहीं होगा रजिस्ट्रेशन
हरियाणा के गुड़गांव, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, पानीपत, रोहतक, मेवात, रेवाड़ी, झज्जर, पलवल, भिवाड़ी, महेंद्रगढ़, जींद व करनाल। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत और मुजफ्फरनगर। राजस्थान के अलवर व भरतपुर।