होली की पूर्वसंध्या पर आगरा, मेरठ, पानीपत, करनाल, ग्वालियर, जयपुर, हल्द्वानी, देहरादून सहित आसपास के शहरों में जाने वालों की सुबह से ही बसों में भारी भीड़ रही। सीट मिली तो आराम से सफर पर रवाना हुए, जिन्हें नहीं मिली उन्होंने भी खड़े होकर सफर किया।
चेहरे पर गुलाल और होली के रंग में डूबे यात्रियों ने बस अड्डों पर खूब धमाल मचाया। सुबह से ही दिल्ली से नजदीकी शहरों के लिए जाने के लिए बसों में यात्रियों का तांता लगा रहा। बुरा न मानो होली कहते हुए हर कोई मस्ती के रंग में झूमता नजर आया। कश्मीरी गेट, आनंद विहार और सराय काले खां पर बसों में यात्रियों की खचाखच भीड़ को देख ऐसा लग रहा था कि दो साल बाद सभी पाबंदियां त्योहार के इस रंग में घुल गई हो।
विज्ञापन
होली की पूर्वसंध्या पर आगरा, मेरठ, पानीपत, करनाल, ग्वालियर, जयपुर, हल्द्वानी, देहरादून सहित आसपास के शहरों में जाने वालों की सुबह से ही बसों में भारी भीड़ रही। सीट मिली तो आराम से सफर पर रवाना हुए, जिन्हें नहीं मिली उन्होंने भी खड़े होकर सफर किया। यात्रियों की भीड़ शाम तक इतनी बढ़ गई कि आईएसबीटी के बाहर भी हर तरफ वाहनों का जाम लगा रहा। तीन दिन की लगातार छुट्टी के कारण भी दफ्तरों में काम करने वाले, छात्र-छात्राओं सहित निजी कंपनियों में भी काम करने वाले बृहस्पतिवार को अपने अपने शहरों के लिए बस और टैक्सी में रवाना हुए।
दिल्ली से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की अधिकतर बसें कश्मीरी गेट से आवागमन करती है। यात्रियों की अधिक संख्या को देखते हुए बसों की संख्या भी बढ़ा दी गईं थीं, बावजूद इसके भीड़ में कमी नहीं आई। खरीदारी के बाद परिजनों के लिए जा रहे सौगात लेकर बसों में रवाना हुए लोग बस यही कहते नजर आए, बुरा न मानो होली है।
विज्ञापन
सराय काले खां और आनंद विहार बस अड्डे पर भी यात्रियों की भारी भीड़ के कारण आसपास जाम की स्थिति बनी रही। दोनों आईएसबीटी पर यात्रियों के साथ साथ अपने सामान सहित बसों के उपर भी सवार होकर यात्री अपने शहरों के लिए रवाना हुए। निजी बसों में भी भारी भीड़ दिखी और सामान अधिक होने की वजह से भी कई यात्रियों से किराया भी अधिक वसूला गया। सराय काले खां से आगरा, ग्वालियर, मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए भी बसें रवाना हुईं। बसों की संख्या बढ़ा दी गई थी ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।
बसों में नहीं मिली जगह तो लिया टैक्सी का सहारा
परिजनों के साथ जा रहे जिन यात्रियों को बसों में जगह नहीं मिली उन्होंने टैक्सी का सहारा लिया। भीड़ अधिक होने की वजह से तीनों बस अड्डे से दूसरे शहरों के लिए जाने वाले टैक्सी चालकों ने भी इस मौके का फायदा उठाया। अपने परिवार के साथ बगैर परेशानी पहुंचने के लिए दूसरे परिवहन साधनों को अपनाया। इस मद में यात्रियों को अधिक खर्च करना पड़ा, लेकिन परेशानी से बचने के लिए इससे गुरेज करते नजर नहीं आए। कुछ ऐसे भी यात्री थे जिन्होंने आपस में मिलकर किराये को साझा किया।