दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनकी सरकार के विज्ञापनों पर भाजपा व कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी पार्टियों ने इसे महिमामंडन वाला प्रचार बताया है। भाजपा ने इस विज्ञापन को अदालत के आदेश का उल्लंघन करार दिया है।
चेतावनी दी है कि अगर इसे तुरंत नहीं हटाया गया तो वह शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। भाजपा ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग को इस बाबत एक पत्र भी लिखा है।
वहीं, दिल्ली महिला आयोग ने विज्ञापन को महिलाओं को अपमानित करने वाला करार दिया है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है कि विज्ञापन में 11 बार केजरीवाल का नाम आना व्यक्ति पूजा का द्योतक है।
जनता के पैसे की बर्बादी
प्रदेश भाजपा का कहना है कि दिल्ली सरकार ने आम जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद कर मुंबई व बिहार के अखबारों में विज्ञापन दिया है। प्रदेश प्रवक्ता हरीश खुराना ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय के 13 मई, 2015 के आदेश का उल्लंघन है।
निर्णय में स्पष्ट है कि सत्ताधारी दल सरकारी पैसे से जारी विज्ञापन में न तो किसी नेता विशेष का महिमामंडन कर सकता है और न ही अन्य दलों की निंदा।
भाजपा इस विज्ञापन पर कानूनी सलाह ले रही है। जल्द ही न्यायालय को इस अवमानना के तरफ ध्यान आकर्षित करेगी। अरविंद केजरीवाल की सरकार को लेकर चल रहे विज्ञापन पर दिल्ली महिला आयोग को ऐतराज है।
आप सरकार को विज्ञापन पर मिलेगा नोटिस
डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष बरखा शुक्ला सिंह का कहना है कि चुनाव से पहले महिलाओं के नाम पर वोट मांगे और अब गद्दी मिलने के बाद उन्हें विज्ञापन के माध्यम से नौकरानी बनाकर दिखाया जा रहा है।
इस विज्ञापन से महिला की छवि धूमिल हो रही है। इस मुद्दे पर सोमवार को सरकार को नोटिस भेजा जाएगा। बरखा के मुताबिक, विज्ञापन में दिखाया गया है कि पत्नी ही भाग-भाग कर काम करती है। जबकि पति आराम से अखबार पढ़ रहा है।
आयोग को इस बात का दुख है कि महिलाओं के अधिकारों का दम भरने वाली आप पार्टी ने विज्ञापन में उसे महज एक काम वाली बना दिया। वह ऑटो, बिल और सब्जी खरीदने में ही बिजी है। हालांकि आम घरों में महिलाओं की बजाय पुरुष काम करते हैं।