दिल्ली के मृत्यु पूर्व बयान को भरोसेमंद मानते हुए हत्या के मामले में अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उत्तर पश्चिम दिल्ली इलाके में दोषी ने होली के दिन अपने ही रिश्तेदार को चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी थी।
रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज जैन ने आरोपी विशाल को मदन लाल की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायई। अदालत ने दोषी पर बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि मुआवजे के तौर पर मृतक की पत्नी को दी जाएगी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा मृत्यु पूर्व बयान देने वाले के मन में वही भावना होती है जो शपथ लेकर बयान देने वाले के मन में होती है। ऐसे माना जाता है कि कोई भी आदमी मरने से पहले झूठ नहीं बोलेगा। मृतक के मृत्यु पूर्व बयान पर भरोसा न करने का कोई कारण नहीं है। ऐसा कोई आधार नहीं है जिसके आधार पर कहा जाए यह बयान झूठा है।
अभियोजन के मुताबिक, मदन लाल 26 मार्च 2013 को अपने घर पर पत्नी व दूसरे रिश्तेदारों के साथ होली मना रहा था। उसने उस समय कहा कि विशाल नशेड़ी है और उसकी पत्नी पर बुरी नजर रखता है। इस आरोप पर नाराजगी जाहिर करते हुए विशाल ने मदन लाल को जान से मारने की धमकी दी थी और कुछ समय बाद चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी थी।