उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए शुरू की गई ऑन स्पॉट बिलिंग की सुविधा पर सिस्टम का ब्रेक लग गया है। सबसे पहले तिलपत सब डिवीजन में इस सुविधा को शुरू किया गया था।
लेकिन एक बार फिर यहां निगम की लचर कार्यशैली ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। करोड़ों रुपये की लागत से शुरू हुई ऑन स्पॉट बिलिंग की सुविधा सालभर भी उपभोक्ताओं को नहीं मिली।
महज नौ महीने बाद ही इसे बंद कर दिया गया। अब एक बार फिर उपभोक्ताओं को मैनुअल तरीके से बिजली के बिल भेजे जा रहे हैं।
ऐसे में एक बार फिर उन समस्याओं का सामना उपभोक्ताओं को करना पड़ रहा है जिनके समाधान के लिए ऑन स्पॉट बिलिंग शुरू हुई थी। गलत बिजली बिलों से उपभोक्ताओं की नींद उड़ी हुई है।
क्या थी ऑन स्पॉट बिलिंग प्रणाली
ऑन स्पॉट बिलिंग सिस्टम के तहत बिजली निगम की बिलिंग एजेंसी के कर्मचारी डोर टू डोर जाकर रीडिंग लेते थे और मौके पर ही बिजली के बिल का प्रिंट दे देते थे। बिल में किसी तरह की गलति की संभावना नहीं होती थी।
अगर कोई गलति होती थी तो उसे मौके पर ही सुधार लिया जाता था। तिलपत सब डिवीजन से बाकायदा बिजली निगम के एमडी अरुण कुमार ने इसकी शुरुआत की थी। इसके बाद पूरे जिले में इसे लागू किया जाना था, लेकिन बिजली निगम की उदासीनता के चलते इस योजना ने बीच में ही दम तोड़ दिया।
अब नई तैयारी में जुटा निगम
पुरानी योजना ठीक से सिरे चढ़ नहीं पाई अब बिजली निगम नई तैयारी कर रहा है। निगम के अधिकारियों का मानना है कि ऑन स्पॉट बिलिंग से उपभोक्ताओं को सहूलियत मिल रही थी।
उपभोक्ताओं से इसका बेहतर फीडबैक भी मिल रहा था, लेकिन ऑनलाइन बिजली के नए सॉफ्टवेयर के चलते इसे बंद कर दिया गया है। जिन कंपनियों ने इस सिस्टम को शुरू किया था अब वहीं कंपनियां इसमें सुधार के लिए नए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर तैयार कर रही हैं।