फरीदाबाद के श्रम विभाग के रवैये के खिलाफ औद्योगिक शहर के श्रमिकों में लगातार असंतोष पनप रहा है।
आरोप है कि अधिकारी श्रमिकों की समस्या का समाधान करने की जगह प्रबंधन की वकालत करते हैं, इसलिए विवाद बढ़ता है। वे श्रमिकों को सिर्फ तारीख देकर टरका देते हैं।
इस समय शहर में विकास स्ट्रिप्स के अलावा शोवा इंडिया, क्लच ऑटो एवं बेलिस इंडिया जैसी कंपनियों में श्रमिक विवाद चल रहे हैं। हाईपोलिमर लैब में भी श्रमिकों ने मांगों को लेकर हड़ताल का नोटिस दिया हुआ है।
श्रमिक संगठनों का आरोप है कि इन सभी कंपनियों के विवाद निपटारे के लिए सिर्फ तारीख पर तारीख पड़ती है। पीड़ित सिर्फ तारीख लेकर श्रम कार्यालय से बाहर आता है। इस तरह हताशा और निराशा से एक दिन उसका धैर्य टूट जाता है।
बताया जा रहा है कि विकास स्ट्रिप्स कंपनी के कर्मचारी विकास के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। इतनी बड़ी घटना के बाद अब श्रम विभाग को होश आया है। हिंद मजदूर सभा के सचिव इंद्रसेन शुक्ल कहते हैं कि शोवा इंडिया मामले का फरवरी 2012 से अब तक श्रम विभाग समाधान नहीं करवा पाया है। अब तक 30 से अधिक तारीखें लग चुकी हैं।
यही हाल क्लच ऑटो के करीब 450 मजदूरों का है। यूनियन प्रधान सतपाल यादव कहते हैं कि साल भर से ज्यादा समय से श्रमिक तालाबंदी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। श्रम विभाग में अब तक 35 से अधिक तारीखें लग चुकी हैं, लेकिन अब तक कमाया हुआ वेतन तक नहीं मिला। समझौता होने के बाद भी प्रबंधक तोड़ देते हैं, लेकिन श्रम विभाग के अधिकारी उन पर कार्रवाई नहीं करते।
श्रम कानून सलाहकार उमेश गुप्ता के अनुसार कुछ कंपनियों के प्रबंधक श्रमिक असंतोष को बढ़ावा देकर माहौल खराब कर रहे हैं। वे श्रम कानून तोड़ने के लिए अधिकारियों को सुविधा शुल्क देते हैं, लेकिन श्रमिकों की बात नहीं सुनते।
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शिवचरण लाल शर्मा ने कहा कि विभिन्न कंपनियों में असंतोष की नौबत क्यों आ रही है, इस बारे में प्रबंधक चिंतन करें। बिना श्रमिकों के कंपनी नहीं चल सकती और कंपनी बिना श्रमिकों का गुजारा नहीं हो सकता, इसलिए दोनों एक दूसरे के महत्व को समझते हुए एक दूसरे का सम्मान करें। कुछ कंपनियों के मालिकों का रवैया श्रमिकों के प्रति ठीक नहीं है। वे अपना नजरिया बदलें।