ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल को नोएडा के ट्रांसपोर्टरों का भी समर्थन मिला है। हालांकि, हड़ताल के पहले दिन मिलाजुला असर दिखाई दिया। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक दो हजार से ज्यादा ट्रकों का चक्का जाम रहा। किसी भी ट्रांसपोर्टर ने शहर से बाहर गाड़ियां नहीं भेजीं, जबकि शहर के अंदर माल ढुलाई जारी रही।
विभिन्न मांगों को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने एक बार फिर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। नोएडा ट्रांसपोर्ट संयुक्त मोर्चा के चौधरी वेदपाल ने बताया कि नोएडा में करीब 550 ट्रांसपोर्टर हैं, जिनमें से अधिकांश ने हड़ताल को समर्थन देते हुए चक्का जाम रखा।
हालांकि, आवश्यक सेवाओं के लिए ट्रकों की आवाजाही जारी रही। इसके अलावा जिले नोएडा के अंदर भी औद्योगिक इकाइयों से माल ढुलाई जारी रही, लेकिन दूसरे राज्यों के लिए गाड़ियाें का संचालन पूरी तरह ठप रहा। शनिवार को हड़ताल का ज्यादा असर दिखाई देगा, क्योंकि कई और ट्रांसपोर्टरों ने इस हड़ताल का समर्थन किया है। वहीं, ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि डीजल की लगातार बढ़ रही कीमत कम होनी चाहिए।
देशभर के टोल पर ट्रकों को लंबी लाइनों में समय की बर्बादी के साथ करोड़ों का इंधन बर्बाद करना पड़ रहा है। फास्ट टैग लेन की सुविधा का लाभ ट्रकों को नहीं मिलता। वहीं, बस ऑपरेटरों को ऑल इंडिया परमिट तो जारी किया जाता है लेकिन हर राज्य में टैक्स वसूला जाता है जो सरासर गलत है।
इसके अलावा ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर टीडीएस खत्म करने आदि की मांग ट्रांसपोर्टरों ने उठाई है। ट्रकों की हड़ताल से औद्योगिक इकाइयों में दूसरे राज्यों से कच्चा माल पहुंचने और तैयार माल बाहर भेजने में समस्या आई। हड़ताल लगातार जारी रही तो इसका बुरा असर उद्योगों पर पड़ सकता है।