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8 अप्रैल को एनसीआर में फिर करवट ले सकता है मौसम

Sun, 05 Apr 2015 11:45 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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देश में कई इलाकों में अप्रैल में भी ओले बरसने की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 8 अप्रैल को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और पश्चिमी यूपी के इलाकों में कहीं-कहीं बौछारें पड़ेंगी और ओले भी गिर सकते हैं।
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मौसम वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह के अनुसार बीते वर्षों में होली के बाद गर्मी शुरू हो जाती थी। 15 अप्रैल के आसपास धूल भरी आंधी शुरू हो जाती थी। लेकिन इस बार अप्रैल में भी फरवरी सा मौसम बना हुआ है।

एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ 7 अप्रैल के आसपास जम्मू कश्मीर पर सक्रिय होगा, जिसके असर से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बारिश हो सकती है। 8 अप्रैल के आसपास दिल्ली एनसीआर और आसपास के शहरों में कहीं कहीं बौछारें पड़ सकती हैं।
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उन्होंने बताया कि बीते दिनों हुई रिकॉर्ड बारिश के कारण वातावरण में नमी बनी हुई है। एक और विक्षोभ आ रहा है। ऐसे में उत्तर और मध्य भारत समेत देश में कहीं कहीं पर ओले गिरने का सिलसिला जारी रहेगा।

8 अप्रैल को विदर्भ और छत्तीसगढ़ में कहीं कहीं पर बारिश, आंधी और ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई है। इसे काल बैसाख भी कहते हैं, जिसमें दिन में मौसम साफ रहता है और शाम को एक से दो घंटे के लिए अचानक मौसम करवट लेता है, जिसमें बारिश, आंधी और ओले गिरते हैं। इससे जान और माल, दोनों को नुकसान होने का खतरा बना रहता है।

एक माह में 95 फीसदी अधिक बारिश
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक मार्च से अप्रैल तक देश में 95 फीसदी अधिक बारिश हुई है। 36 सब डिवीजनों में से 20 सब डिवीजन में औसत से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

इनमें उत्तर प्रदेश में 444 फीसदी, हरियाणा में 458 फीसदी, दिल्ली में 536 फीसदी, राजस्थान में 1021 फीसदी, पंजाब में 168 फीसदी, उत्तराखंड में 114 फीसदी और हिमाचल प्रदेश में 64 फीसदी अधिक बारिश हुई है।

यूपी के गौतमबुद्ध नगर में 516 फीसदी और गाजियाबाद में 249 फीसदी अधिक बारिश हुई है। सबसे ज्यादा बारिश कानपुर (सिटी) में 1903 फीसदी रिकॉर्ड की गई है।

ऐसे बनते हैं ओले
एक किलोमीटर ऊपर जाने पर तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस कम हो जाता है। वातावरण में 12 किलोमीटर ऊपर जाने पर तापमान -50 डिग्री होता है। पश्चिमी विक्षोभ में भाप होती है।

यह भाप जब -50 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचती हैं, तो जमकर ओले के रूप में परिवर्तित हो जाती है। भाप जितना ज्यादा ऊपर होगी, ओलों का आकार उतना ही ज्यादा बड़ा होगा।
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