ओम प्रकाश चौटाला की लोकप्रियता के कई अहम उदाहरण है। वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके साथ समझौता किया था और उसे बवाना, नजफगढ़ व महिपालपुर (अब बिजवासन) सीट दी थी। वहीं वर्ष 2008 में वह भाजपा से सीट मांग रहे थे, लेकिन भाजपा के स्थानीय नेताओं के विरोध के कारण उन्हें सीट नहीं मिली और भाजपा आलाकमान के कहने पर उन्होंने उम्मीदवार नहीं उतारे, मगर नजफगढ़ सीट पर भाजपा की ओर से मजोर उम्मीदवार उतारे जाने पर उनके समर्थक भरत सिंह निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतर गए और इनेलो ने उनकी मदद के लिए पूरी ताकत लगा दी और वह जीत गए। चौटाला की यह राजनीतिक सूझबूझ बताती है कि वे दिल्ली के ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं की नब्ज पहचानने में कितने सक्षम थे।
चौटाला ने विधानसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि एमसीडी के चुनावों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वर्ष 2012 के चुनाव में उनकी पार्टी के तीन उम्मीदवार चुनाव जीते थे। नजफगढ़ क्षेत्र से दो और पालम क्षेत्र से एक पार्षद जीता था। वहीं वर्ष 2017 भी नजफगढ़ क्षेत्र में उनका एक पार्षद जीता था। इससे पहले वर्ष 2007 में भी नजफगढ़ में उनका पार्षद जीतने में सफल रहा था।
चौटाला की लोकप्रियता का मुख्य कारण उनका ग्रामीण समाज और उनकी समस्याओं के प्रति समर्पण। था। उनके भाषणों में हमेशा किसानों, मजदूरों और गरीबों के मुद्दे केंद्र में रहते थे। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी और शिक्षा के अवसरों की कमी जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया।
हालांकि इनेलो का वर्तमान में दिल्ली की राजनीति में प्रभाव सीमित हो गया है, लेकिन चौटाला के समय की राजनीति ने कई स्थानीय नेताओं को प्रेरित किया। उनकी रणनीति और ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करने का तरीका आज भी राजनीति के लिए प्रासंगिक है।