हिमाचल के विधायकों को दिया काम का मूल मंत्र
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों ने अपने प्रतिनिधियों को बहुत सारी जिम्मेदारियां दी हैं। इसलिए उन्हें पूर्ण समर्पण भाव के साथ जन कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। विधानसभा एक ऐसा महत्वपूर्ण मंच है, जिसके माध्यम से समाज के सबसे कमजोर वर्गों की भावनाओं को मुखरित किया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि जनप्रतिनिधि लोगों की समस्याओं का समाधान करें। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोगों की प्रतिक्रिया, विशेषज्ञों के दृष्टिकोण, व्यापक वाद-विवाद और विधायकों के अपने अनुभव से ही लोक कल्याण के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कानून बनाए जा सकते हैं ।
विधानसभा की हर कार्यवाही में भाग लेना चाहिए
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्षों में भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुपालन के फलस्वरूप बड़े पैमाने पर और व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन आया है। भारतीय लोकतंत्र कई लोगों की धारणाओं को गलत साबित करते हुए समय की कसौटी पर खरा उतरा है। नवनिर्वाचित सदस्यों से विधायी कार्यवाही में भाग लेने का आग्रह करते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि सदस्यों को यथासंभव अधिकाधिक अनुभव प्राप्त करना चाहिए और विधायी कार्यवाही और बहस में भाग लेना चाहिए। वाद-विवाद और चर्चाओं के सावधानीपूर्वक विश्लेषण और शोध से विधायी अनुभव बढ़ता है।
हिमाचल विधानसभा के कामकाज की खुलकर की तारीफ
लोकसभा अध्यक्ष ने राज्य विधान मंडलों में बैठकों की संख्या में कमी पर भी चिंता व्यक्त भी की। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा सत्र की अवधि कम कर दी जाती है, तो नवनिर्वाचित सदस्य महत्वपूर्ण विधायी अनुभव से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने इस बात की भी सराहना की कि हिमाचल विधानसभा को पहली ऐसी विधानसभा होने का गौरव प्राप्त है जो पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस है । लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा के भीतर और बाहर विधायकों का आचरण निंदा से परे होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि विधायी निकाय हमेशा तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर बहस करें। विधानसभाओं में रचनात्मक बहस से लोगों में सकारात्मक संदेश जाता है। सभी जनप्रतिनिधियों को निराधार तथ्यहीन आरोपों से बचना चाहिए। सदन की कार्यवाही में सुनियोजित व्यवधान के संदर्भ में लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि इस तरह के आचरण और अनुशासनहीनता को सभी सदस्यों को हतोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा अमर्यादित आचरण से सदन की गरिमा कम होती है और इससे शासन संस्थानों में जनता का विश्वास भी कम होता है।