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खतरे में पड़ा एक लाख ई-रिक्शों का भविष्य

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ई-रिक्शा को सड़कों पर उतारने के लिए नीति बन चुकी है। यह किन-किन सड़कों पर चलेंगे यह भी तय हो गया है। लाइसेंस आसानी से बन सकें इसके लिए तीन दिन में कमर्शियल लाइसेंस देने को मंजूरी मिल चुकी है। चालक को लाइसेंस बनवाते समय आठवीं की मार्कशीट दिखाने से भी छूट मिली है।
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इतनी छूट के बाद भी फिलहाल दिल्ली की सड़कों पर एक लाख से ज्यादा पुराने ई-रिक्शा को सड़क पर उतारने की डगर मुश्किल लग रही है।

30 नवंबर तक मांगी है पुराने ई-र‌िक्शा की सूची

ई-रिक्शा के डिजाइन को लेकर एक मानक तय किया गया है। इसी मानक के अनुसार ही नए ई-रिक्शा अब सड़क पर उतर पाएंगे।

पुराने ई-रिक्शा पर यह मानक लागू होंगे, लेकिन इन्हें राहत देते हुए कहा गया है कि सड़क पर जितने भी ई-रिक्शा चल रहे है उसमें प्रत्येक डिजाइन से रैंडम एक ई-रिक्शा की टेस्टिंग होगी।

वह टेस्टिंग में पास हो जाता है तो उसी डिजाइन के दूसरे ई-रिक्शा को चलने की मंजूरी दे दी जाएगी। हालांकि विशेषज्ञ इसका विरोध कर रहे हैं।

परिवहन विभाग ने इसके लिए 30 नवंबर तक ई-रिक्शा संगठनों से पुराने ई-रिक्शा की सूची भी मांगी, मगर अभी तक उनके टेस्टिंग को लेकर कोई व्यवस्था नहीं की गई।

द‌िल्ली में नहीं है कोई जांच एजेसी

बताया जा रहा है कि 30 नवंबर तक दिल्ली परिवहन विभाग को 50 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा की सूची ही संगठनों की ओर से उपलब्ध कराई गई है, जबकि माना जाता है कि दिल्ली में पाबंदी से पहले एक लाख से ज्यादा ई-रिक्शा थे।

परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक उनके पास ऐसी कोई एजेंसी का ढांचा नहीं है जिससे पुराने ई-रिक्शा की टेस्टिंग की जा सके। फिलहाल कोई एजेंसी भी तय नहीं हो पाएगी। परिवहन विभाग इस संबंध में केंद्र सरकार को भी अवगत करा चुकी है।

अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में भी ऐसी कोई एजेंसी नहीं है जिससे यह टेस्टिंग कराई जा सके। इस तरह की एजेंसी पूना, अहमदाबाद समेत दूसरे शहरों में हैं। इससे फिलहाल पुराने ई-रिक्शा को सड़क पर उतरने को लेकर असमंजस बरकरार है।
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क्या कहते है विशेषज्ञ

इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर रिसर्चर, एसपी सिंह ने कहा क‌ि अगर पुराने ई-रिक्शा को सड़क पर उतारा जाता है तो यह यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा। हम शुरू से इसका विरोध कर रहे हैं। क्योंकि पुराने ई-रिक्शा में एक ही डिजाइन के अलग-अलग रिक्शा में ही विभिन्नताएं हैं।

यह 2013 में टेरी की एक रिपोर्ट में कहा जा चुका है। ऐसे हालात में एक ही ई-रिक्शा की टेस्टिंग करके बाकी उसी डिजाइन के सभी रिक्शा को मंजूरी देना सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा।
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