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ऑटो परमिट घोटाले में अधिकारी निलंबित, सीबीआई करेगी जांच

Wed, 02 Mar 2016 11:31 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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बीते साल दिसंबर में हुए दस हजार ऑटो परमिट घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने इसकी मंजूरी दे दी है।
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मंगलवार को यह फाइल जांच के लिए सीबीआई को भेज दी गई है। इसके साथ ही सरकार ने इस घोटाले में एक और अधिकारी को निलंबित कर दिया है। अब तक इस घोटाले में कुल चार लोगों का निलंबित किया जा चुका है। सतर्कता विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर केजरीवाल सरकार ने बीते शुक्रवार को ही मोटर लाइसेंसिंग अफसर (एमएलओ) रामानाथन जो कि घोटाले के समय से बुराड़ी ऑटो यूनिट में ही तैनात थे उन्हें निलंबित करने का आदेश दे चुके थे।

इसके साथ ही सीबीआई जांच की भी मंजूरी भी दे दी थी। परिवहन आयुक्त के छुट्टी पर होने के कारण यह निलंबन का आदेश सोमवार को  हुआ। मंगलवार को फाइल सीबीआई को भेज दी गई है।
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इससे पहले परमिट घोटाले में बुराड़ी ऑटो यूनिट में तैनात डिप्टी कमिश्नर एस रॉय विश्वास, इंसपेक्टर मनीष पुरी और एक यूडीसी अनिल यादव को निलंबित किया गया था।
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परमिट आवंटन में ऐसे हुई गड़बड़ी

दरअसल परमिट बांटने की प्रक्रिया सरकार आवेदनों की संख्या के लिहाज से तय करती है। अगर आवेदन परमिट संख्या से अधिक आए है तो ड्रॉ के जरिये परमिट बांटा जाता है।

मगर पहले चरण में 12 से 27 जनवरी 2015 के बीच दस हजार परमिट के लिए कुल 13,442 आवेदन मिले, जिसमें 3592 आवेदन दो बार थे। इस तरह कुल 9850 आवेदन ही सही मिले। जिसके चलते दूसरे चरण में फिर 28 जनवरी से 13 फरवरी के बीच दूसरे चरण का आवेदन मंगाए गए। उसमें भी इन्हें पांच हजार से अधिक आवेदन मिले।

पहले चरण में आए आवेदनों की संख्या परमिट से कम होने के चलते उन्हें ड्रॉ के बजाए आवेदन के क्रमवार पहले आने वाले को पहले परमिट देने की नीति तय हुई। मसलन किसी ने 12 जनवरी को आवेदन किया तो उसे लेटर आफ इंटेंट (एलओआई) पहले जारी होगा। इस तरह अगर किसी ने 15, 16, 17 जनवरी को किया तो उसका नंबर भी तारीख के क्रमवार आएगा। यहीं पर गड़बड़ी की नींव पड़ गई। दलालों ने अधिकारियों के साथ मिलकर बाद में आए आवेदनों को सूची में ऊपर डालकर परमिट के लिए एलओआई ले लिया।

जिन्होंने वास्तव में पहले आवेदन किया था उनका नाम गायब मिला। जांच में पता चला कि 932 परमिट के एलओआई में 32 से 40 फीसदी लोग ऐसे है जिनका पता गलत है। इसमें फाइनेंसर शामिल हैं।
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