स्वाइन फ्लू के मरीज अथवा उसकी मौत को दिल्ली सरकार तभी मानेगी, जब सैंपल की जांच सरकार की ओर से अधिकृत लैब से की गई हो।
गंगा राम अस्पताल में गाजियाबाद की महिला की स्वाइन फ्लू से हुई मौत को दिल्ली सरकार के नोडल अधिकारी मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि सैंपल की जांच अधिकृत लैब से नहीं की गई थी, लिहाजा मृतका के सैंपल की दोबारा जांच की जाएगी।
दिल्ली सरकार के स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी डॉ. चरण सिंह ने बताया कि अधिकृत लैब के अलावा अन्य लैब में की गई जांच रिपोर्ट को सरकार नहीं मानती।
इसलिए गंगा राम अस्पताल की स्वाइन फ्लू की नोडल अधिकारी डॉ. शालिनी से उस मरीज का सैंपल मांगा गया है, ताकि दोबारा से जांच की जा सके।
डॉ. सिंह ने बताया कि सरकारी लैब में एनसीडीसी, पटेल चेस्ट और एम्स के लैब को ही अधिकृत किया गया है। वहीं, निजी लैब में ओरोप्रोब, डैंग, अपोलो, रैनबैक्सी और लाल लैब को अधिकृत किया गया है। डॉ. सिंह ने कहा कि इस महिला मरीज की रिपोर्ट लाल लैब की नहीं थी।
उधर, गंगा राम अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का कहना है जब 21 दिसंबर को गाजियाबाद से महिला अस्पताल पहुंची, तो उसके पास लाल लैब की जांच रिपोर्ट थी, जिसमें स्वाइन फ्लू पॉजिटिव था।
उसके अस्पताल की लैब में दोबारा जांच की गई। यहां भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद 22 दिसंबर को इसकी सूचना दिल्ली सरकार के स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी को दे दी गई थी और अब मरीज का कोई सैंपल अस्पताल के पास नहीं है।