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अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस : सेवा, संवेदनशीलता, करुणा व साहस की मिसाल हैं नर्स; स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत कड़ी

Tue, 12 May 2026 04:30 AM IST
Vijay Singh Pundir सोनम प्रतिहस्त, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में नर्सों की भूमिका केवल इलाज तक सीमित नहीं है। मरीजों को मानसिक सहारा देना, उनके परिजनों को समझाना और सकारात्मक माहौल बनाना भी उनकी अहम जिम्मेदारी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, इमरजेंसी की जिम्मेदारी और हर कठिन परिस्थिति में सबसे पहले साथ खड़ी नजर आने वाली नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी मानी जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर हर साल उनके समर्पण, साहस और संवेदनशीलता के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। नर्सें केवल स्वास्थ्यकर्मी नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और समर्पण की जीवंत मिसाल हैं, जो हर दिन मरीजों को जीवन को उम्मीद देती हैं।

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आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में नर्सों की भूमिका केवल इलाज तक सीमित नहीं है। मरीजों को मानसिक सहारा देना, उनके परिजनों को समझाना और सकारात्मक माहौल बनाना भी उनकी अहम जिम्मेदारी है। मरीजों के साथ सबसे अधिक समय बिताने वाली नर्सें अस्पतालों का सबसे मानवीय चेहरा मानी जाती हैं। कोविड महामारी के दौरान भी नर्सों ने अपनी सेवा भावना और हिम्मत से समाज के सामने मिसाल पेश की। लंबे समय तक पीपीई किट में ड्यूटी, संक्रमण का खतरा और लगातार काम के दबाव के बावजूद वे दिन-रात सेवा में जुटी रहीं।

मरीजों का भरोसा बनाए रखना, जरूरतों का ध्यान रखना है चुनौती
कविता सिंह पंवार को नर्सिंग की प्रेरणा भाई के इलाज के दौरान मिली। वर्तमान में वे आईवाईसीएफ काउंसलर और डायबिटिक एजुकेटर के रूप में कार्यरत हैं। वहीं, स्वामी दयानंद अस्पताल की सिस्टर सितारा का कहना है कि मरीजों का भरोसा बनाए रखना और उनकी जरूरतों का ध्यान रखना नर्सिंग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। गुरु तेग बहादुर अस्पताल के गीतेश ने बताया कि कोविड काल में नर्सों ने कठिन परिस्थितियों में सेवा देकर खुद को असली वॉरियर साबित किया।

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